तेल का खेल: रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत तो कैसे चलेगी अर्थव्यवस्था?

नई दिल्ली:यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका और नाटो देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं और अब भारत, चीन जैसे देशों को चेतावनी दी है कि अगर वे रूस से तेल खरीदते रहे तो उन पर 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। यह चेतावनी भारत के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से आने वाले सस्ते कच्चे तेल से पूरा कर रहा है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और वर्ष 2024-25 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जिसमें उसका हिस्सा 35.1% तक पहुंच गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी है, वहीं नाटो महासचिव मार्क रूटे ने भारत, चीन और ब्राजील को सेकेंडरी सैंक्शन की चेतावनी दी है। जानकारों के अनुसार यह रणनीति रूस पर दबाव बनाकर उसे शांति वार्ता के लिए मजबूर करने की योजना हो सकती है।
भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अमेरिका और नाटो की धमकियों से भारत नहीं घबराएगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक तेल बाजार में फिलहाल सप्लाई पर्याप्त है और निकट भविष्य में कीमतें घट सकती हैं। लेकिन अगर रूस से तेल खरीद बंद हुई तो वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। पुरी ने कहा कि तेल की कीमतें स्थिर रखने के लिए या तो पूरी दुनिया को 10% कम तेल इस्तेमाल करना होगा जो संभव नहीं है, या फिर बाकी 90% सप्लायर्स से ज्यादा तेल खरीदना होगा, जिससे कीमतें बहुत बढ़ जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत पर 100% टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका के लिए भारत से आयात महंगा हो जाएगा, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा और ट्रंप के लिए राजनीतिक मुश्किल खड़ी हो सकती है।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार रूस के कच्चे तेल का 47% चीन, 38% भारत, 6% यूरोपीय संघ और 6% तुर्की खरीद रहे हैं। वर्ष 2021-22 में भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा सिर्फ 2.1% था, जो अब 35.1% हो गया है। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत ने अपने तेल स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 40 देशों तक फैला दिया है और यदि रूस से आपूर्ति रुकती है तो ब्राजील, कनाडा और गयाना जैसे देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि IOC जैसी कंपनियां पहले की तरह पश्चिम एशियाई देशों से आयात कर सकती हैं। सरकार के अनुसार भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक भंडार है जिससे संकट के समय कुछ महीनों तक काम चलाया जा सकता है।
अभी तक ट्रंप की यह धमकी तेल बाजार पर खास असर नहीं डाल पाई है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति केवल रूस पर दबाव बनाने की चाल हो सकती है और भारत जैसे देश अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलन की नीति अपनाएंगे।





