लव मैरिज की सजा: मौत पर भी समाज ने छोड़ा साथ

देवगढ़:ओडिशा के देवगढ़ जिले के तिलेइबनी ब्लॉक के जराइकेला गांव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। 80 वर्षीय बसंती महाकुद की मंगलवार को मौत हो गई, लेकिन उनकी जाति से बाहर शादी करने की वजह से समुदाय ने उनका अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

बसंती ने 50 साल पहले अपनी मर्जी से दूसरी जाति के लोकनाथ महाकुद से शादी की थी, जिसके बाद दोनों को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था। पति की चार साल पहले मौत के बाद बसंती सरकारी ग्रामीण आवास योजना में मिले घर में अकेले रह रही थीं। वह कई महीनों से बीमार थीं और पड़ोसी उनकी देखभाल कर रहे थे।

मंगलवार दोपहर जब पड़ोसी खाना देने पहुंचे तो बसंती घर के फर्श पर मृत अवस्था में मिलीं। गांव और समुदाय के लोगों को सूचना दी गई, लेकिन कोई भी अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आया। घंटों तक महिला का शव घर में पड़ा रहा। आखिरकार पूर्व पंचायत समिति सदस्य बलराम गडनायक ने हस्तक्षेप किया और स्थानीय स्वयंसेवक अक्षय साहू से संपर्क किया।

अक्षय साहू समेत कई स्वयंसेवक जैसे बिप्रचरण जयपुरिया, प्रसन्ना धाल, बिनोद बरुआ, टूना बेहरा, रमेश नायक, संजय किंडो और सिल्वेस्टर बहल ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। बाद में भीम आर्मी की देवगढ़ यूनिट के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। भारी बारिश के बावजूद मंगलवार शाम महिला की शव यात्रा निकाली गई और रीति-रिवाज के साथ सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।

बलराम गडनायक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जाति से बाहर शादी करने पर इस दंपती को जिंदगीभर सामाजिक अलगाव झेलना पड़ा और मरने के बाद भी समुदाय ने मुंह मोड़ लिया। उन्होंने स्वयंसेवकों का आभार जताया जिन्होंने इंसानियत दिखाते हुए महिला को अंतिम सम्मान दिया।

 

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button