आपातकाल के 50 वर्ष: संघ ने की ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की मांग, राहुल गांधी पर भी हमला

दिल्ली। आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए ‘समाजवादी’ और ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की मांग की है।
संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इन शब्दों को 1976 में इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था, जब देश में लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों का गला घोंटा गया था। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा तैयार मूल संविधान में ये शब्द नहीं थे।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए होसबाले ने कहा कि अब समय आ गया है कि इन शब्दों को हटाने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की प्रति लेकर देशभर में घूम रहे लोगों को उन ऐतिहासिक भूलों के लिए माफी मांगनी चाहिए, जिनमें लाखों लोगों को जेल में डाला गया, पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया और लाखों लोगों को जबरन नसबंदी झेलनी पड़ी।
होसबाले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि उन्हें आपातकाल के लिए देश से क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब लोकतंत्र को कुचला गया, तब न्यायपालिका, संसद और मीडिया पूरी तरह निष्क्रिय थे।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान बदलने का आरोप लगा रहे हैं, वे भूल जाते हैं कि आपातकाल के दौरान उनकी पार्टी ने ही संविधान की धज्जियां उड़ाई थीं। उन्होंने कहा कि आपातकाल सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए एक बड़ा सबक है।





