हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अविवाहित दत्तक पुत्री की संपत्ति पर दावा खारिज, मां को माना गया असली वारिस

रायगढ़। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि अविवाहित महिला की संपत्ति पर केवल उसकी मां का ही अधिकार होगा, भले ही उसने जीवनभर किसी और को गोद क्यों न लिया हो।
यह मामला रायगढ़ निवासी खितिभूषण पटेल से जुड़ा है, जिन्होंने अपने छोटे भाई की बेटी ज्योति पटेल को गोद लेकर उसकी परवरिश की थी। ज्योति को अनुकंपा के तहत पुलिस विभाग में नौकरी भी मिली थी। लेकिन 2014 में ज्योति की मृत्यु अविवाहित अवस्था में हो गई।
ज्योति की बैंक और बीमा पॉलिसी में खितिभूषण का नाम नॉमिनी (नामांकित) के रूप में दर्ज था। इसी आधार पर खितिभूषण ने उसकी संपत्ति पर अपना दावा किया। लेकिन सिविल कोर्ट ने उनके दावे को खारिज कर दिया।
अब हाईकोर्ट की जस्टिस एन.के. व्यास की एकलपीठ ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ नामिनी होने से कोई व्यक्ति संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15 और 16 के अनुसार, अविवाहित महिला की संपत्ति पर उसकी मां का पहला अधिकार होता है। चूंकि ज्योति के पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए अब उसकी मां ही संपत्ति की एकमात्र वैध वारिस होंगी।
इस फैसले से यह साफ हो गया है कि उत्तराधिकार के मामलों में कानून के अनुसार तय उत्तराधिकारी को ही संपत्ति मिलती है, न कि केवल नॉमिनी को।





