जस्टिस वर्मा केस: कैश बरामदगी पर बोले VP धनखड़, एफआईआर में देरी और जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली:उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से कथित नकदी बरामदगी के मामले में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने में देरी, जांच की धीमी रफ्तार और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले पर भी दोबारा विचार करने की जरूरत बताई।
जांच समिति के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त करने पर नाराजगी
धनखड़ ने इस मामले की जांच कर रही तीन जजों की इन-हाउस समिति द्वारा गवाहों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कैसे किया जा सकता है, यह न्यायिक प्रणाली पर बड़ा सवाल है।
“बड़ा शार्क कौन है?” – वैज्ञानिक जांच की मांग
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस मामले में वैज्ञानिक तरीके से आपराधिक जांच की जरूरत है। उन्होंने पूछा कि क्या यह मामला दबा दिया जाएगा या धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा? साथ ही उन्होंने जानना चाहा कि पैसे का स्रोत क्या है, इसका उद्देश्य क्या था और क्या इससे न्याय व्यवस्था प्रभावित हुई है?
वीरास्वामी फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत
दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान धनखड़ ने कहा कि अब 1991 के ‘के. वीरास्वामी बनाम भारत संघ’ फैसले पर दोबारा विचार करने का समय आ गया है। इस फैसले में कहा गया था कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों पर मुकदमा चलाने के लिए पहले मंजूरी लेनी होगी। धनखड़ ने कहा कि यह सोचने का वक्त है कि क्या यह नियम अब भी उपयुक्त है।
उल्लेखनीय है कि मार्च में जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया था, उसी दौरान उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास से भारी नकदी मिलने की खबर सामने आई थी।





