BYJU’S में सेल्स की तकनीकी दिक्कत, लेकिन कुछ नहीं बेचूंगा: रविंद्रन

दिल्ली। BYJU’S के संस्थापक और सीईओ बायजू रविंद्रन ने कहा कि वह कभी भी ऐसा कोई उत्पाद किसी को नहीं बेचेंगे जो वे अपने बेटे को नहीं देंगे। उन्होंने समाचार एजेंसी से चर्चा के दौरान इस बात को कहा है। उन्होंने कंपनी के कड़े सेल्स तकनीकों को लेकर हुए आरोपों को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि कंपनी ने उन गलतियों को सुधार लिया है। रविंद्रन ने बताया कि BYJU’S “सीखने के प्यार” को बेच रही है और तकनीक के जरिए शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास कर रही है।
रविंद्रन ने माना, “कुछ सौ सेल्स कर्मचारी गलतियां कर बैठे थे, लेकिन हमने उन्हें सुधारा। आज स्कूलों में अच्छे शिक्षक मिलना मुश्किल है। इस समस्या का समाधान टेक्नोलॉजी के माध्यम से ही संभव है।” उन्होंने कहा कि वे कभी भी ऐसा उत्पाद नहीं बेचेंगे जो उनके घर में इस्तेमाल न होता हो। उनका बेटा व्हाइटहैट जूनियर के माध्यम से गणित और कोडिंग सीख रहा है।
BYJU’S की सीखने की पद्धति
BYJU’S के इंटरैक्टिव तरीके पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य छात्रों में “कैसे सीखें” की कला को विकसित करना है। उन्होंने कहा, “आज BYJU’S का कोई विकल्प नहीं है। हम ऐसे वीडियो और गेम जैसे इंटरैक्शन बना रहे हैं जिससे बच्चे पढ़ाई से प्यार करें। भविष्य में स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली स्किल्स शायद उपयोगी न हों, इसलिए सीखने की कला को मजबूत करना जरूरी है।”
बाजार में BYJU’S का दबदबा
रविंद्रन ने बताया कि BYJU’S दुनिया की सबसे बड़ी एजुकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी है। “हमारे उत्पाद CBSE, राज्य बोर्ड और ICSE से जुड़े हुए हैं। हमने पिछले 10 सालों में इतना निवेश किया है, जो दुनिया में किसी और ने नहीं किया। हमारे यूजर्स की संख्या खान अकादमी से भी अधिक है।”
कानूनी विवाद का सामना करना पड़ा रहा कंपनी को
हालांकि BYJU’S को वित्तीय समस्याएं, कानूनी विवाद और नियामक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, रविंद्रन ने हार मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “मीडिया में गलत कहानियां चल रही हैं, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे। आप कैसे हरा सकते हैं किसी को जो कभी हार नहीं मानता?” आपको बता दे, कि 2011 में स्थापित BYJU’S ने कोविड-19 के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में खास पहचान बनाई। हालांकि इस कंपनी की तेजी से हुई उभरने के बाद उसका पतन भी उतनी ही तेज़ी से हुआ।





