सड़कों पर आवारा मवेशियों की भरमार, दुर्घटनाओं का बना कारण – योजनाएं रह गईं कागजों तक

बिलासपुर: जिले में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या अब लोगों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई है। जिले में करीब 35 हजार बेसहारा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं, जो रोजाना दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं। इन मवेशियों की वजह से न केवल आम जनता बल्कि खुद पशुओं की जान भी खतरे में है।

राज्य सरकार ने इन्हें सड़क से हटाकर गो अभयारण्य और पशु आश्रय गृहों में रखने की योजना बनाई है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि ये योजनाएं ज्यादातर कागजों तक सीमित रह गई हैं। प्रशासन की ओर से प्रयास तो हुए, लेकिन पुनर्वास स्थायी रूप से नहीं हो पाया।

कोटा ब्लॉक के जोगीपुर में 156 एकड़ जमीन पर गो अभयारण्य बनाया जा रहा है, जिसमें मवेशियों के लिए शेड और चारागाह मनरेगा के तहत तैयार किए गए हैं। इस योजना में लगभग 14 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन अब तक अभयारण्य पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है, और न ही वहां पशु चिकित्सा विभाग की देखरेख की व्यवस्था ठीक से हो सकी है।

प्रशासन ने कई बार अभियान चलाकर रात में मवेशियों को पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन यह प्रयास नियमित और प्रभावी नहीं हो सके।

हाई कोर्ट के निर्देशों और सरकारी योजनाओं के बावजूद आवारा पशुओं का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। जब तक इन योजनाओं पर ठोस अमल नहीं होता, तब तक सड़कों पर आवारा मवेशियों का खतरा बना रहेगा।

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