जानिए पहलगाम हमले की पुरी सच्चाई, कि आखिर भारत कैसे पहुंचे आतंकी..

 कश्मीर। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पूरा देश आक्रोश में है। साथ ही इस मामले में दुनियाभर के देशों ने भारत का समर्थन किया है। वही इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली है। यह लश्कर-ए-तैयबा का ही एक संगठन हैं। इसके आतंकी साजिद जट्ट, सज्जाद गुल और सलीम रहमानी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं। वही हमलावर तीनों आतंकियों का स्केच जारी कर NIA ने जांच शुरू कर दी है। इस हमले में कोच्चि  नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल, हैदराबाद के IB अधिकारी मनीष रंजन, रायपुर के व्यापारी दिनेश मिरानिया भी मारे गए। बता दे हमले में मारे गए लेफ्टिनेंट नरवाल हरियाणा के मूल निवासी थे और 16 अप्रैल को उनकी शादी हुई थी।

 

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि आखिर आतंकी पहलगाम तक पहुंचे कैसे? साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी इस हमले के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आतंकियों का यूं खुलेआम हथियारों के साथ घुसना और अंधाधुंध फायरिंग करना कई सवाल खड़े करते है। क्या पहलगाम पर्यटन स्थल के आस-पास सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी या फिर आतंकी पूरी जानकारी के साथ वहां पहुंचे थे और सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात तो ये है कि तीनों आतंकवादी बगैर इंटरनेट का इस्तेमाल किए पहलगाम तक कैसे पहुंचे? आइये जानते हैं, इस मामले की पूरी सच्चाई आखिर क्या है?

 

पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है. आतंकियों ने जंगलों के भीतर दिशा खोजने और सटीक लोकेशन तक पहुंचने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया था। सूत्रों के अनुसार, ‘AlpineQuest’ नामक इस ऐप ने आतंकियों को बैसरन इलाके तक बिना किसी गाइड के पहुंचने में मदद की, जहां उन्होंने पर्यटकों को निशाना बनाया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह कोई पहली बार नहीं है जब इस ऐप का आतंकवादियों द्वारा प्रयोग हुआ हो। इससे पहले जम्मू क्षेत्र के जंगलों में भी इसी ऐप की मदद से आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया गया था. ‘AlpineQuest’ एक नेविगेशन आधारित ऐप है जो रियल टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और ऑफलाइन मैप्स जैसी सुविधाएं देता है। जो कि घने जंगलों में रास्ता ढूंढ़ने के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है।

 

इस ऐप की खास बात यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट की ज़रूरत नहीं होती। यही कारण है कि आतंकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की निगाहों से बचने के लिए इस तकनीक को चुना। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस ऐप की गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू कर दिया है। सूत्रों का मानना है कि यह रणनीति पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना द्वारा रची गई थी, ताकि आतंकी सटीकता से हमलों को अंजाम दे सके। इतना ही नहीं, आतंकियों को इस ऐप के इस्तेमाल की बाकायदा ट्रेनिंग भी दी गई थी। और यह प्रशिक्षण सरहद पार स्थित उनके हैंडलरों द्वारा दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह प्रोफेशनल ट्रेनिंग उन्हें भारत की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से बचाने और जटिल इलाकों में सटीक संचालन करने के उद्देश्य से दी गई थी।

 

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का गठजोड़ है. ये आतंकी गुट ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ जैसे मुखौटा संगठनों का इस्तेमाल कर नए तरह के ‘हिट स्क्वाड’ तैनात कर रहे हैं, जो जंगलों और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में छिपने में सक्षम हैं। TRF का ‘फाल्कन स्क्वाड’ ऐसे मॉड्यूल्स में अग्रणी माना जा रहा है। इस आतंकी हमले का मुख्य उद्देश्य अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी में डर और अस्थिरता फैलाना था।  यह रणनीति ‘हिट एंड रन’ हमलों की है। जिसमें हमला कर आतंकवादी तुरंत भाग जाते हैं और फिर ओवर ग्राउंड वर्कर्स की मदद से दुबक जाते हैं। यह नया खतरा सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जहां टेक्नोलॉजी को भी आतंक का हथियार बनाया जा रहा है।

 

AlpineQuest GPS एक उन्नत नेविगेशन ऐप है, जिसे विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो ट्रेकिंग, शिकार, हाइकिंग और जियोकैशिंग जैसे बाहरी गतिविधियों में रुचि रखते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करता है। उपयोगकर्ता इसमें टोपोग्राफिक मैप्स को ऑफलाइन सेव कर सकते हैं, जीपीएस के ज़रिए रीयल-टाइम ट्रैकिंग कर सकते हैं और अपनी लोकेशन से जुड़े पॉइंट्स को सेव और शेयर कर सकते हैं। इस ऐप में कई उपयोगी फीचर्स शामिल हैं जैसे ऑफलाइन मैप्स की सुविधा, रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग, मैग्नेटिक सेंसर आधारित कंपास, दूरी मापन, विभिन्न प्रकार के मैप सपोर्ट और डेटा को KML या KMZ फॉर्मेट में एक्सपोर्ट करने का विकल्प है। यह ऐप खासतौर पर उन स्थानों के लिए बेहद उपयोगी है जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होता, जैसे पहाड़ों, जंगलों या दूरदराज़ के इलाकों में। इसकी मदद से उपयोगकर्ता अपनी गतिविधियों का ट्रैक रख सकते हैं और उन्हें बाद में एनालाइज भी कर सकते हैं।

 

वही पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट मीटिंग में 5 बड़े फैसले लिए गए। बैठक ढाई घंटे चली। इसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए अज‍ित डोभाल समेत कई अफसर मौजूद रहे। इस बैठक में भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द करने का फैसला किया है साथ ही 48 घंटे के अंदर भारत छोड़ने की कड़ी चेतावनी भी दी है। इसी कड़ी में पाकिस्तान में भारतीय दूतावास बंद करने और सिंधु जल समझौता रद्द करने का फैसला भी लिया गया है। अटारी-वाघा बॉर्डर को भी बंद कर दिया गया है। दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात रक्षा और सैन्य सलाहकारों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित किया गया है। साथ ही 1 हफ्ते के अंदर भारत छोड़ने का आदेश जारी किया गया है।

 

पाकिस्तानी पीएम आए दहशत में

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 24 अप्रैल की सुबह नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (NSC) की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। वहीं, पाकिस्तान के मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत सर्जिकल स्ट्राइक जैसा कोई कदम न उठाए। फिलहाल भारत में आक्रोश के माहौल को देखते हुए पाकिस्तान पूरी तरह से डरा हुआ है, जिसके कारण उन्हें लगातार बैठकें लेनी पड़ रही है। वही पाकिस्तान ने भारत के सर्जिकल स्ट्राइक जैसी मूवमेंट पर अधिकारीयों को पैनी नजर रखने की सख्त हिदायत दी है। फिलहाल पाकिस्तान ने इस हमले में उनका कोई हाथ नहीं होने की बात कही है, लेकिन सच क्या है ये पूरी दुनिया जानती हैं। वही इस आतंकी हमले के बाद से दुनियाभर के देशों ने भारत को अपना समर्थन दिया है साथ ही इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है।

 

15 दिन पहले पहुंचे थे आतंकी

 

सूत्रों के मुताबिक आतंकी साजिद जट्ट, सज्जाद गुल और सलीम रहमानी 15 दिन पहले भारत पहुंचे थे। जिसके बाद उन्होंने रैकी कर वारदात की जगह चुनी और प्लान के मुताबिक इस खुनी खेल को अंजाम दिया। उन्होंने रैकी कर भड़भाग वाले जगह की तलाश की इस दौरान उन्होंने पहलगाम पर हमला करने का मसूबा बनाया और 22 अप्रैल को जब लोग अपने परिवार के साथ पर्यटन स्थल का मजा ले रहे थे, तब आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर पूरी घटना को अंजाम दिया। इस पूरी घटना में हैरानी वाली बात ये है कि 15 दिनों से आतंकी जम्मू-कश्मीर की वादियों में मौजूद थे और जगह-जगह रैकी कर रहे थे, लेकिन किसी भी सुरक्षा एजेंसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। बता दें भारत में NIA, IB और RAW जैसे सुरक्षा एजेंसियों के रहते यहां आतंकवादी घुस आते हैं और 15 दिनों में प्लान बनाकर एक खुनी खेल को अंजाम दिया जाता है। इसके बाद आतंकी आसानी से रफूचक्कर भी हो जाते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगती। बता दें जम्मू-कश्मीर को एक आतंकवाद के मामले में के संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों की ये बड़ी चूक कई सवाल खड़े कर रही है ,

 

फिलहाल इस घटना के बाद देशभर के लोगों में पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ आक्रोश का माहौल है। वही इस घटना के बाद देशवासी दहशत में आ गए हैं। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर जाने वाले हजारों यात्रियों ने अपनी यात्रा केंसिल कर दी है। इसके तहत लोगों द्वारा ट्रैन और फ्लाइट की टिकटों को लगातार कैंसिल कराया जा रहा है। ऐसे में अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वाले यात्री भी दहशत के कारण अपनी यात्रा टाल रहे हैं।

 

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button