जवाली पुल बना ‘कमर्शियल हब’, अनुमति बिना बन रहे व्यवसायिक परिसर

बिलासपुर।
कमर्शियल हब: नगर निगम द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खा रही है। शहर के जवाली पुल क्षेत्र में बिना अनुमति के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स धड़ल्ले से खड़े किए जा रहे हैं और नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है।

जहाँ अनुमति नहीं, वहीं पर व्यावसायिक निर्माण!
जवाली पुल क्षेत्र ऐसी जगहों में गिना जाता है, जहां व्यवसायिक निर्माण की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, यहां लगातार नए कमर्शियल स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि नगर निगम ने 10 दिन पहले अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

नगर निगम आयुक्त की सफाई
नगर निगम आयुक्त अमित कुमार का कहना है कि—

“निर्माण कर्ताओं ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मांगा था। यदि वे इस सप्ताह के भीतर दस्तावेज नहीं देते हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल कुछ निर्माण सामग्री जब्त की गई है और संतोष यादव नामक व्यक्ति को जवाब प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सवाल अब भी कायम
जब व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं है, तो इन स्ट्रक्चर को किस आधार पर खड़ा किया जा रहा है?

क्या नगर निगम की ओर से मिली मोहलत सिर्फ कार्रवाई को टालने का तरीका है?
क्या बिल्डरों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत है?
इन सवालों के जवाब जनता जानना चाहती है। फिलहाल, निगम की निष्क्रियता और निर्माण कर्ताओं की सक्रियता शहर में अवैध निर्माण के बढ़ते ग्राफ को उजागर कर रही है।
अगर नगर निगम ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो जवाली पुल जैसे क्षेत्र पूरी तरह कमर्शियल हब में तब्दील हो जाएंगे — वह भी क़ानून को ताक पर रखकर।

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