समाज को जागरूक कर रहे हैं कवि शुभकान्ति कर: कविता को बना रहे बदलाव का माध्यम

बिलासपुर निवासी और एसईसीएल के सेवानिवृत्त अधिकारी शुभकान्ति कर केवल एक कवि नहीं, बल्कि समाज के सजग प्रहरी हैं। बंगाल के प्रतिष्ठित कवि और लेखक के रूप में पहचान बना चुके शुभकान्ति कर की कविताएं न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों में भी पढ़ी और सराही जा रही हैं। शुक्रवार को प्रेस क्लब बिलासपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि वे कविता को केवल भावना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने वाला माध्यम मानते हैं।

राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर पैनी नजर

शुभकान्ति कर ने कहा कि उनकी कविताओं का मकसद समाज में मौजूद राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विसंगतियों को उजागर करना है। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं और जनता को सोचने पर मजबूर करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे बंगाली, हिंदी और अंग्रेजी – तीनों भाषाओं में लेखन करते हैं, जिससे उनकी बात एक बड़े वर्ग तक पहुंचती है। अब तक उनकी 10 किताबें कोलकाता के डेज़ पब्लिशर से प्रकाशित हो चुकी हैं, जो साहित्य प्रेमियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विचारकों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।

370 हटाने के फैसले की सराहना

कवि शुभकान्ति कर ने धारा 370 हटाने के फैसले की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम को देश को एक सूत्र में बांधने वाला बताया। उनके अनुसार, “370 के हटने के बाद ही हम कह सकते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है।”

शुभकान्ति कर मानते हैं कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है। आने वाले समय में उनकी कविताएं और लेख समाज को नई सोच और नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे, यह विश्वास साहित्यिक जगत में भी देखा जा रहा है।

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