प्रदूषण से विटामिन D की कमी का क्या है कनेक्शन ?

विटामिन D का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत सूरज की रोशनी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब यही सूरज की किरणें हमें पूरी तरह से नहीं मिल पा रही हैं? इसकी मुख्य वजह है तेजी से बढ़ता वायु प्रदूषण। भारत के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि सूरज की अल्ट्रावॉयलेट-B (UVB) किरणें हमारी त्वचा तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे शरीर में विटामिन D का निर्माण नहीं हो पा रहा।
हाल ही में ICRER द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि दिल्ली में 72% से ज्यादा लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह और भी गंभीर रूप ले सकती है।
प्रदूषण रोक रहा सूरज की रोशनी
इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के कारण सूरज की UVB किरणें धरती तक पहुंचने में बाधित हो रही हैं, जिससे त्वचा में विटामिन D का संश्लेषण कम हो जाता है। प्रदूषित वायुमंडल में मौजूद कण और गैसें सूरज की UVB किरणों को अवशोषित कर लेती हैं, जिसके कारण शरीर में विटामिन D की प्राकृतिक मात्रा घट रही है। इसके साथ ही, शहरी इलाकों में उच्च प्रदूषण स्तर के कारण लोग घर में ही रहना पसंद करते हैं, जिससे सूर्य की रोशनी में समय बिताने का मौका और भी कम हो जाता है।
विटामिन D की कमी से क्या होता है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, विटामिन D की कमी से केवल हड्डियों की समस्याएं ही नहीं होतीं, बल्कि यह पूरे शरीर की सेहत को प्रभावित करती है। आंकड़ों के मुताबिक, 10 साल तक के 46% बच्चे रिकेट्स से पीड़ित हैं, वहीं 80-90% बुजुर्ग ऑस्टियोपोरोसिस से जूझ रहे हैं, जिससे हड्डियों का टूटना और स्थायी विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है।
विटामिन D की कमी के अन्य प्रभाव:
हड्डियों में कमजोरी, रिकेट्स और ऑस्टियोपोरोसिस
मसल्स पेन और कमजोरी
थकान, चिड़चिड़ापन और कम ऊर्जा
इम्यून सिस्टम का कमजोर होना
डिप्रेशन और मूड स्विंग्स
क्या करें?
सूरज की रोशनी से विटामिन D प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि आप प्रदूषण वाले इलाकों में भी कुछ समय बाहर बिताने की कोशिश करें। साथ ही, विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए सही आहार और सप्लीमेंट्स का सेवन करें।
समय रहते इस पर ध्यान दें ताकि आपकी सेहत पर इसका बुरा असर न पड़े।





