वक्फ संशोधन विधेयक 2024 लोकसभा में पारित, मुसलमानों के मुद्दे पर विपक्ष की एकता ने दिखाई ताकत

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025: मोदी सरकार द्वारा पेश वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को लोकसभा में पारित करा लिया गया है। निचले सदन में बुधवार को आयोजित वोटिंग में 288 मत सरकार के पक्ष में और 232 मत विपक्ष के पक्ष में आए। इस विधेयक को पास करना सरकार की जीत साबित हुई, लेकिन इस पर विपक्ष के एकजुट होकर जोरदार विरोध ने हालिया राजनीतिक माहौल में नई हलचल मचा दी है।
विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ
वक्फ संशोधन विधेयक पिछले साल 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्ष की तीखी आपत्तियों के बाद इसे संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में भेजा गया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जेपीसी द्वारा प्रस्तावित 14 संशोधनों को मंजूरी दे दी। जेपीसी की रिपोर्ट, जिसकी अध्यक्षता बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने की, 13 फरवरी को संसद में पेश की गई थी। इसके बाद विधेयक को अंतिम रूप देकर 2 अप्रैल को लोकसभा में पारित कराया गया।
विपक्ष का तीखा विरोध
विधेयक के पारित होने के बावजूद विपक्ष ने इसे असंवैधानिक और मुसलमानों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, DMK सहित कई विपक्षी दलों ने लोकसभा में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस के के. सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार का एकमात्र एजेंडा भारत माता को बांटना है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि यह विधेयक मानव अधिकारों का उल्लंघन करने का जरिया बन सकता है।
विरोधी दलों की एकजुटता
विरोध ने वक्फ संपत्तियों के हक पर सरकार की नजर को कड़ा करार दिया। कई विपक्षी नेताओं का मानना है कि आज की इस कार्रवाई से कल अन्य धर्मों की संपत्तियाँ भी निशाने पर आ सकती हैं। समाजवादी पार्टी के मोहिबुल्लाह और अन्य विपक्षी नेताओं ने विधेयक को समानता और मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कहा कि मुसलमान इस मसौदा कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। ओवैसी समेत अन्य विपक्षी सांसदों ने भी सदन में इस विधेयक का विरोध करते हुए कड़ा रुख अपनाया।
राजनीतिक परिदृश्य में असर
हालांकि विपक्षी दलों में पिछली चुनावों में कुछ असहजता और विभाजन देखे गए थे, लेकिन इस वक्फ बिल पर उनके एकजुट विरोध ने उनकी राजनीतिक ताकत को पुनः मजबूत करने का संकेत दिया है। विपक्ष के 232 मत का आंकड़ा उन दलों के लिए बूस्टर डोज साबित हो सकता है, जो आगामी चुनावों में सरकार के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाने की कोशिश करेंगे।





