तमिलनाडु में कच्चातीवु द्वीप को लेकर छिड़ी सियासत, कानून मंत्री रघुपति ने उठाई मांग

चन्नई, 3 अप्रैल 2025: तमिलनाडु सरकार ने 1974 के समझौते के अनुसार श्रीलंका को सौंपे गए कच्चातीवु द्वीप को वापस पाने की मांग को लेकर नई सियासी हलचल मचाई है। राज्य के कानून मंत्री एस. रघुपति ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को अपना क्षेत्र वापस पाने का पूरा हक है।

कच्छातीवु द्वीप की मांग पर जोर

कानून मंत्री रघुपति ने बताया कि कच्चातीवु द्वीप पर श्रीलंका के कब्जे को समाप्त करना ही सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ द्वीप को वापस लेना नहीं है, बल्कि उस क्षेत्र से जुड़े संसाधनों और समुद्री अधिकारों का भी पुनः प्राप्ति करना है।” मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 1974 के समझौते के तहत श्रीलंका को सौंपे गए द्वीप को पुनः अपने कब्जे में लेने का निर्णय लिया है।

वेज बैंक को लेकर उठे सवाल

कानून मंत्री ने वेज बैंक से कच्चातीवु द्वीप को जोड़ने के खिलाफ अपनी निंदा व्यक्त करते हुए कहा कि यह अस्वीकार्य है। वेज बैंक, जो कन्याकुमारी के दक्षिण में स्थित है और मछली पकड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, उसके फायदे को द्वीप के साथ जोड़ना राज्य के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि, “हम अपना स्थान वापस चाहते हैं और वेज बैंक को कच्चातीवु से जोड़ना न्यायसंगत नहीं है।”

विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

तमिलनाडु विधानसभा ने भी कच्चातीवु द्वीप को वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया। इस प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने इस प्रस्ताव की समयसीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राज्य में कानून-व्यवस्था चरम पर है, तब ऐसे प्रस्ताव पारित करना उचित नहीं। वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे को एक व्यापक क्षेत्रीय मसले के रूप में देखने का आग्रह किया, जिसमें वे 1974 और 1976 के दोनों समझौतों से हुए फायदों का विश्लेषण करने का पक्ष लेते हैं।

आगे की राह

कांग्रेस संगठन के अनुसार, तमिलनाडु को केवल द्वीप की मांग नहीं करनी चाहिए, बल्कि उससे प्राप्त संसाधनों और समुद्री क्षेत्रों के महत्व पर भी ध्यान देना चाहिए। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्व में सरकार ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।

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