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वक्फ संशोधन विधेयक 2024: सरकार और विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली: केंद्र सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पारित कराने का प्रयास करेगी। इस विधेयक में 1995 के वक्फ कानून में बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन होगा, जबकि विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है।

वक्फ उन संपत्तियों को कहा जाता है, जो धार्मिक और समाजसेवा से जुड़े कार्यों के लिए आरक्षित होती हैं। इस्लामिक कानून के अनुसार, वक्फ की गई संपत्ति को बेचा या किसी अन्य उपयोग में नहीं लाया जा सकता। एक बार वक्फ घोषित होने के बाद वह संपत्ति अल्लाह के नाम हो जाती है और उसका मालिकाना हक दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।

भारत में वक्फ का इतिहास

भारत में वक्फ का इतिहास दिल्ली सल्तनत के दौर से जुड़ा है। सबसे पहले सुल्तान मुहम्मद गोरी ने दो गांवों को वक्फ घोषित कर मुल्तान की जामा मस्जिद के नाम किया था। इसके बाद मुगलों और अन्य इस्लामी शासकों ने भी वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़ाई।

वक्फ संपत्तियों की स्थिति

आज भारत में रेलवे और सेना के बाद वक्फ बोर्ड के पास सबसे अधिक संपत्ति है। पूरे देश में लगभग 8.7 लाख संपत्तियां वक्फ बोर्ड के अधीन हैं, जो लगभग 9.4 लाख एकड़ भूमि पर फैली हुई हैं। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये बताई जाती है।

सरकार की दलीलें

1. सुधार का दावा: नए कानून से वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में सुधार होगा और प्रबंधन अधिक पारदर्शी बनेगा।

2. तकनीक का उपयोग: वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड को डिजिटल करने की योजना है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।

3. औपनिवेशिक कानून की समाप्ति: सरकार 1923 के वक्फ कानून को खत्म कर इसे अधिक आधुनिक और व्यावहारिक बनाना चाहती है।

विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की चिंताएं

1. धार्मिक हस्तक्षेप का आरोप: विपक्ष का कहना है कि सरकार धार्मिक मामलों में दखल दे रही है और वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करना चाहती है।

2. गैर-मुस्लिमों की भागीदारी: नए कानून में वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे मुस्लिम संगठनों को आपत्ति है।

3. संपत्ति के सरकारीकरण की आशंका: सांसद असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि नए कानून से सरकार वक्फ संपत्तियों को सरकारी संपत्ति में बदल सकती है।

सरकार को इस विधेयक को पास कराने के लिए गठबंधन सहयोगियों के समर्थन की जरूरत होगी। पहले इसे संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजा गया था, जहां कुछ बदलावों के बाद इसे फिर से लोकसभा में पेश किया जा रहा है। विपक्ष इसे असंवैधानिक बता रहा है, जबकि सरकार इसे वक्फ संपत्तियों के लिए जरूरी सुधार कह रही है। अब देखना होगा कि यह विधेयक संसद में पारित हो पाता है या नहीं।

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