नई दिल्ली:प्रयागराज में 5 घर ध्वस्त, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमारी आत्मा को झकझोरा, 10-10 लाख का हर्जाना मिले

नई दिल्ली, 01 अप्रैल 2025 – प्रयागराज में अवैध निर्माण के नाम पर पांच घरों को ध्वस्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए प्रयागराज विकास प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाई और पांचों पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
यह मामला तब सामने आया जब एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य व्यक्तियों के घरों को प्रशासन द्वारा बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए गिरा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, “यह हमारी आत्मा को झकझोरता है। राइट टू शेल्टर भी एक मौलिक अधिकार है, और किसी भी नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के बेघर नहीं किया जा सकता।”
कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना किसी नोटिस के लोगों के घर तोड़ देना पूरी तरह से अवैध है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर यूपी सरकार को फटकार लगाई थी। नवंबर 2024 में कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि जिस व्यक्ति का घर तोड़ा गया है, उसे 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि “सरकारों को कानून को अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है। मकान सिर्फ एक संपत्ति नहीं बल्कि पूरे परिवार के लिए आश्रय होता है।”
सीएम योगी का बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि “बुलडोजर कार्रवाई कोई उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की आवश्यकता थी। जरूरत के मुताबिक प्रशासन ने जो उचित समझा, वह किया।”
जनता की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद प्रयागराज में पीड़ित परिवारों को राहत मिली है। कई नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया और सरकार से मांग की कि आगे से इस तरह की कार्रवाई को रोका जाए।





