कांग्रेस ने निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग दोहराई

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर देश के निजी, गैर-अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण लागू करने की मांग उठाई है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार को इसके लिए जल्द से जल्द कानून लाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने भी संविधान के अनुच्छेद 15 (5) को लागू करने के लिए एक नए कानून की सिफारिश की थी। यह अनुच्छेद सरकार को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है। इसके तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर सभी सार्वजनिक और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू किया जा सकता है।

कांग्रेस की पुरानी मांग

जयराम रमेश ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने तब भी निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करने के लिए कानून लाने की बात कही थी। अब संसदीय समिति की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा कर रही है, इसलिए सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।”

उन्होंने बताया कि संविधान (93वां संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत अनुच्छेद 15 (5) को जोड़ा गया था और यह 20 जनवरी 2006 से लागू हुआ। इसके बाद केंद्रीय शिक्षण संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 संसद में पारित किया गया, जिससे 3 जनवरी 2007 से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों को आरक्षण मिलने लगा।

नई शिक्षा नीति पर भी कांग्रेस का निशाना

कांग्रेस ने नई शिक्षा नीति की भी आलोचना की। जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में शिक्षा के ‘केंद्रीकरण, व्यावसायीकरण, निजीकरण और सांप्रदायिकरण’ पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा, “हमारे संविधान में शिक्षा समवर्ती सूची में है, जिसका मतलब है कि इसकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य दोनों की है। लेकिन वर्तमान सरकार शिक्षा को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है, जिससे इतिहास को बदला जा रहा है और शिक्षा को एक खास विचारधारा से जोड़ा जा रहा है।”

सरकार से मांग

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से तुरंत एक नया कानून लाने की मांग की है, जिससे निजी शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण लागू किया जा सके। पार्टी का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा और इससे वंचित वर्गों को समान अवसर मिल सकेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

 

 

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