कांग्रेस की दलित सियासत: बिहार में 40 साल पुरानी प्रतिष्ठा लौटाने की कोशिश

नई दिल्ली, 20 मार्च 2025:बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी सियासी रणनीति को नया मोड़ दिया है। पार्टी ने बिहार में दलित समुदाय को ध्यान में रखते हुए राज्य कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में राजेश कुमार को नियुक्त किया है। राजेश कुमार, जिनका ताल्लुक रविदास समुदाय से है, कांग्रेस के लिए एक मजबूत दलित चेहरा बन सकते हैं। उनका नाम कांग्रेस के अंदर के परिवारिक सियासी परंपरा से जुड़ा हुआ है, क्योंकि उनके पिता दिलकेश्वर राम बिहार में दलितों के बड़े नेता थे।
राजेश कुमार की नियुक्ति राहुल गांधी की दलित सियासत का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें कांग्रेस बिहार में अपनी खोई हुई सियासी ताकत को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष का पद दलित समुदाय से आने वाले व्यक्ति को सौंपकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी बिहार में दलित वोट बैंक को फिर से अपने पक्ष में करना चाहती है। राजेश कुमार की विरासत और उनके द्वारा कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से लगातार जीतने की वजह से उनका चयन कांग्रेस की रणनीति को मजबूत करता है।
कांग्रेस की नजर बिहार के दलित समुदाय के करीब 18 प्रतिशत वोटों पर है, और पार्टी उम्मीद कर रही है कि राजेश कुमार के नेतृत्व में वे इस वोट बैंक को हासिल कर पाएंगे। खासतौर पर, कांग्रेस का ध्यान रविदास, मुसहर और पासवान जैसे दलित समुदायों पर है, जिनका बिहार में महत्वपूर्ण राजनीतिक असर है। कांग्रेस ने दलित नेताओं को पार्टी में शामिल करने के साथ ही अपने सामाजिक न्याय के एजेंडे को भी और मजबूत किया है।
राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस अब दलित और मुस्लिम वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने का प्रयास कर रही है, जिससे बिहार में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित किया जा सके। यह देखना अब बाकी है कि क्या राजेश कुमार और राहुल गांधी के प्रयास बिहार के दलित समुदाय का विश्वास जीतने में सफल हो पाते हैं।





