कांग्रेस में छिड़ी जंग : किसे मिलेगी प्रदेश कांग्रेस की कमान ?

रायपुर : छत्तीसगढ़ में लोकसभा, विधानसभा और नगरीय निकाय… लगभग सभी चुनाव निपट चुके हैं… सभी चुनावों में BJP ने एकतरफा जीत हासिल की…और अब सिर्फ त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव बाकि है… और बाकि चुनावों की तरह, BJP इसमें भी बेहतर प्रदर्शन करती दिख रही.. वहीं कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है.. जिसके चलते कांग्रेस नेताओं में गुटबाजी और आपसी जंग छिड़ चुकी है… कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी दबाव बढ़ गया है…
बता दें कि कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मंथन शुरु हो गया है… नए अध्यक्ष को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पुर्व डिप्टी CM, TS सिंहदेव के नाम सामने आ रहे हैं… वहीं दीपक बैज को एक और मौका देने की भी बातें हो रही है.. क्योंकि उन्हें संगठन में काम करने का बेहद कम समय मिला… इस लिहाज से उन्हें और मोहलत दी जानें की बातें हो रही है.. लेकिन पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि दीपक बैज को पद से हटाया जाए.. जिसकी वजह ये भी कही जा रही है कि पार्टी बैज के नेतृत्व में लगभग सभी चुनाव हार गई…
पार्टी के नेताओं में छिड़ी जंग
हाल ही में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं हार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि हम पार्टी के 4 बड़े नेता, भुपेश बघेल, TS सिंहदेव, दीपक बैज और चरणदास महंत के कारण चुनाव हारे हैं… जिसके बाद रायपुर उत्तर, से पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने भी अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है…और कहा कि अगर दीपक बैज, प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे तो मैं राजीव भवन जाना छोड़ दुंगा… और अपनी बात दिल्ली तक ले जाने की भी बात कही…
सिंहदेव के नाम पर लामबंद हुए कई बड़े नेता
अब इन सब हंगामें और आपसी कलह के बाद कांग्रेस हाईकमान पर नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए दबाव बढ़ रहा है… इसके अलावा PCC चीफ के लिए टीएस सिंहदेव का नाम चर्चा में आते ही प्रदेश के कई बड़े नेता लामबंद हो गए हैं.. वो प्रदेश कांग्रेस की कमान किसी आदिवासी नेता को देने की मांग कर रहे हैं… और सूत्रों के मुताबिक, अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जैसे कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और शिवकुमार डहरिया दिल्ली पहुंच गए हैं…
कौन कर सकता है सबसे अच्छा नेतृत्व ?
वहीं, इस मुद्दे पर दिल्ली तक लॉबिंग शुरू हो चुकी है। जिसे लेकर सिंहदेव का कहना है कि किसी को सिर्फ जातीय या वर्गीय आधार पर पद नहीं मिलना चाहिए, बल्कि ये देखना जरूरी है कि कौन सबसे अच्छा नेतृत्व कर सकता है। इधर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, विधायक लखेश्वर बघेल, पूर्व विधायक संतराम नेताम और फूलीदेवी नेताम भी काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं..
आदिवासी नेतृत्व की उठ रहा मांग
इसके अलावा कांग्रेस में ये चर्चा जोरों पर है कि आदिवासी नेतृत्व को आगे लाया जाए या टीएस सिंहदेव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। आदिवासी नेताओं का तर्क है कि चूंकि मुख्यमंत्री पद गैर-आदिवासी नेता विष्णुदेव साय के पास है, ऐसे में प्रदेश कांग्रेस की कमान आदिवासी नेता को दी जानी चाहिए… इसके लिए प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं ने विधायक इंदर शाह मंडावी और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का नाम आगे बढ़ाया है। हालांकि, भगत के खिलाफ ईडी और आईटी की जांच को देखते हुए उनकी संभावनाएं कमजोर मानी जा रही हैं…
पंचायत चुनाव के बाद होगा फैसला
वहीं, दूसरी ओर, पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का नाम भी चर्चा में है, लेकिन पार्टी के एक बड़े गुट की प्राथमिकता अब भी टीएस सिंहदेव ही हैं…फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे सिंहदेव ही हैं… लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कभी भी अंतिम निर्णय लिया जा सकता है… ऐसे में आने वाले हफ्ते छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सियासत के लिए बेहद अहम रहने वा





