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गुजरात में चांदीपुरा वायरस से 14 की गई जान, ये ‘खास मक्खी’ बन रही मौत की वजह!

गुजरात के कई जिलों में चांदीपुरावायरस है. चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है, जो सबसे ज्यादा मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है. इसके फैलने के पीछे मच्छर में पाए जाने वाले एडीज जिम्मेदार हैं. इस वायरस को साल 2004 से 2006 और 2019 में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में रिपोर्टकियागया था. गुजरात में अब तक इसके 27 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 14 लोगों की मौत हो चुकी है.

गुजरात के 12 जिलों में संदिग्ध मामले सामने आए हैं. 27 में से 24 केस गुजरात के हैं और अन्य तीन दूसरे राज्यों से गुजरात आए हैं. सबसे ज्यादा मामले साबरकांठा और अरावली में मिले हैं, जहां 4-4 लोग चांदीपुरा से संक्रमित पाए गए. रहस्यमयी मौतों के सैंपल जब लैब भेजे गए, तब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने एक चार साल की बच्ची में चांदीपुरा वायरसकीपुष्टिकी.

चांदीपुरा वायरस के लक्षण क्या हैं?

चांदीपुरा वायरस होने से रोगी को बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ऐंठन की शिकायत होती है. इसमें फ्लू जैसे ही लक्षण होते हैं और तेज एन्सेफलाइटिस होती है. एन्सेफलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिससे दिमाग में सूजन की शिकायत होती है. कुछ मरीजों में सांस की समस्या और खून की कमी जैसे लक्षण भी देखे जा चुके हैं. वहीं डॉक्टर्स का कहना है कि यह वायरस मक्खियों से ज्यादा फैलता है. पहले 24 से 72 घंटे बेहद अहम हैं, क्योंकि उसी वक्त इसकी घातकता ज्यादा होती है. अगर इतने समय में अस्पताल पहुंच गए तो इलाज मुमकिन है.

चांदीपुरा वायरस से कैसे बचें?

रेत में पाई जाने वाली मक्खियों से बचाव ही चांदीपुरा वायरस से बचाव का पहला चरण है. इसके लिए कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है. मक्खी और मच्छरों से बचने के लिए फुल कपड़े पहनें और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. साथ ही वायरस से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को चांदीपुरा वायरस के जोखिमों और बचाव के बारे में जागरूक करके भी इससे काफी हद तकबचाजासकताहै.

चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है?

चांदीपुरा वायरस का कोई खास एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन नहीं है. लक्षणों का इलाज और जटिलताओं से बचकर ही चांदीपुरा को रोका जा सकता है. गंभीर लक्षणों वाले मरीजों, खासकर बच्चों को अक्सर अस्पताल में भर्ती कराया जाता है. शरीर को हाइड्रेट करना सबसे अहम है. खासकर उल्टी होने की स्थिति में. बुखार को कम करने के लिए दवाएं ले सकते हैं. गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षणों, जैसे सांस और न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं के केस में इंटेंसिव केयर की जरूरतपड़सकतीहै.

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा कोई नया वायरस नहीं है. 1965 में पहला मामला महाराष्ट्र में दर्ज किया गया था. इस वायरस के मामले हर साल गुजरात में दर्ज किए जाते हैं. यह बीमारी वेक्टर-संक्रमित सैंडफ्लाई के डंक से होती है. यह मुख्य रूप से 9 महीने से 14 साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह अधिक देखने को मिलता है. बुखार, उल्टी, दस्त और सिरदर्द इसके मुख्य लक्षण हैं. ये लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. राज्य सरकार ने सभी के लिए एडवाइजरी जारी की है.

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