छात्राओं का आरोप: बिना गणित शिक्षक पढ़ाई, फिर 150 से ज्यादा छात्राएं फेल; डीईओ कार्यालय का घेराव
सरकंडा कन्या शाला पर गंभीर आरोप, डीईओ के रवैये से भड़के छात्राएं और परिजन

बिलासपुर के सरकंडा स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में (छात्राओं का आरोप) शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कक्षा 9वीं में पूरे सत्र के दौरान गणित का शिक्षक ही नहीं था, फिर भी परीक्षा कराई गई और 150 से ज्यादा छात्राओं को गणित में फेल कर दिया गया। इससे नाराज छात्राओं और उनके परिजनों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव कर न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और जिला शिक्षा अधिकारी दोनों ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।
डीईओ के रवैये से भड़के छात्राएं और परिजन (छात्राओं का आरोप)
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि पूरे शैक्षणिक सत्र में उन्हें गणित पढ़ाने के लिए कोई नियमित शिक्षक नहीं मिला। कई बार स्कूल प्रबंधन से शिकायत की गई, लेकिन हर बार यही आश्वासन दिया गया कि गणित विषय में सभी को पास कर दिया जाएगा। छात्राओं का आरोप है कि इसी भरोसे के बाद परीक्षा दिलाई गई, लेकिन परिणाम आने पर 150 से अधिक छात्राओं को गणित में अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि सप्लीमेंट्री परीक्षा में भी उन्होंने वही प्रश्न हल किए जो शिक्षिका ने बताए थे, फिर भी उन्हें फेल कर दिया गया। उनका कहना है कि जब पढ़ाई ही नहीं कराई गई तो उन्हें फेल करना पूरी तरह अन्याय है। छात्राओं की मांग है कि सभी प्रभावित विद्यार्थियों को पास घोषित किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पहले कलेक्टर कार्यालय भी पहुंचे थे, जहां से उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के पास भेज दिया गया। लेकिन डीईओ कार्यालय में भी उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई। छात्राओं का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक ने उनकी बात सुनने के बजाय नया आवेदन देने की बात कही और मौजूदा शिकायत स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
वहीं, जब इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक से पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने कैमरे पर कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि “जो चलाना है, जो लिखना है, आप उसके लिए स्वतंत्र हैं।” अब बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यार्थियों को पूरे साल गणित का शिक्षक नहीं मिला, तो उनकी शैक्षणिक जिम्मेदारी आखिर किसकी है? और यदि आरोप सही हैं, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई होगी या छात्राओं को न्याय के लिए आंदोलन का रास्ता ही अपनाना पड़ेगा।





