बंगाल में सत्ता बदलते ही अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, एक के बाद एक हो रही कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के आने के बाद अभिषेक बनर्जी कई मामलों में कार्रवाई के केंद्र में आ गए हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से लेकर संपत्तियों की जांच और सुरक्षा में कटौती तक कई बड़े कदम उठाए गए हैं।
दरअसल, 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कई सख्त फैसले लिए। इसके बाद चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषण को लेकर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। उन पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में अभिषेक ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की मांग भी की है।
इसी बीच उनकी ‘जेड-प्लस’ सुरक्षा भी वापस ले ली गई है। पिछले करीब 10 साल से उन्हें यह सुरक्षा मिली हुई थी। अब उन्हें सामान्य सांसदों जैसी सुरक्षा व्यवस्था दी गई है। उनके अलावा टीएमसी के कुछ अन्य नेताओं की सुरक्षा भी घटाई गई है।
वहीं कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी की कई संपत्तियों को लेकर नोटिस जारी किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि अभिषेक की 24 संपत्तियां जांच के दायरे में हैं। नगर निगम ने 21 संपत्तियों के दस्तावेज और नक्शे पेश करने को कहा है। आरोप है कि कुछ इमारतों का निर्माण तय नक्शे के अनुसार नहीं हुआ।
अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान के चुनाव से पीछे हटने को भी बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। फलता सीट से चुनाव लड़ने वाले जहांगीर खान ने मतदान से ठीक पहले अपना नाम वापस ले लिया। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अभिषेक बनर्जी पर बढ़ती कार्रवाई अब राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है।





