डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की 98वीं जयंती पर बिलासपुर में साहित्यिक-सांस्कृतिक समागम

छत्तीसगढ़ी संस्कृति और गद्य साहित्य के युग प्रवर्तक कीर्तिशेष डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा की 98वीं जयंती पर रविवार को बिलासपुर में भव्य बौद्धिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ‘समन्वय परिवार’ के तत्वावधान में किया गया, जिसमें प्रदेशभर से साहित्यकार, शिक्षाविद् और प्रबुद्धजन शामिल हुए।
समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. चित्तरंजन ने की।

इस अवसर पर डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा से जुड़ी कई साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण किया गया। साथ ही साहित्य, समाजसेवा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभिन्न व्यक्तित्वों और संस्थाओं को ‘आत्मीय सारस्वत सम्मान’ सहित कई सम्मान प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा को केवल लोकगीतों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सशक्त गद्य साहित्य के रूप में नई पहचान दिलाई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षाविद् और साहित्यकार के रूप में उनका योगदान आज भी प्रेरणादायी माना जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनाएं नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं।





