पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का संदेश: वैश्विक हस्तक्षेप की अपील, अमेरिका पर जताया अविश्वास

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस युद्ध का असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर पड़ रहा है, इसलिए सभी देशों को इसे रोकने के लिए आगे आना चाहिए।

अमेरिका की नीतियों पर सवाल

इलाही ने अमेरिका की नीतियों पर भरोसा करना मुश्किल बताते हुए कहा कि ईरान किसी भी संभावित कार्रवाई के लिए तैयार है। उनका कहना है कि दुनिया को यह पूछने के बजाय कि ईरान जवाब क्यों दे रहा है, उन पक्षों को जिम्मेदार ठहराना चाहिए जिन्होंने इस संघर्ष की शुरुआत की।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

उन्होंने आरोप लगाया कि युद्धविराम के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं डाली जा रही हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों पर असर पड़ रहा है।

बातचीत के प्रयासों का जिक्र

इलाही के अनुसार, ईरान ने कई बार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की। ओमान और जिनेवा में बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही थी, लेकिन अचानक हुए हमलों ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया।

भारी नुकसान और मानवीय संकट

उन्होंने आरोप लगाया कि हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया, जिससे हजारों लोगों की जान गई और भारी नुकसान हुआ।

“न युद्ध, न शांति” की स्थिति

इलाही ने कहा कि फिलहाल हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं, बल्कि “न युद्ध, न शांति” की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि तनाव अभी भी बरकरार है और संघर्ष दोबारा भड़क सकता है।

ईरान का रुख स्पष्ट

ईरान ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए तैयार है। इलाही ने जोर देकर कहा कि अगर वैश्विक शक्तियां आगे आकर हस्तक्षेप करें, तो क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता बहाल की जा सकती है।

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