AAP में ‘चाणक्य’ का डबल क्रॉस? अंदरूनी रणनीति ने ही दी केजरीवाल को मात

दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी(AAP) को लगा सबसे बड़ा झटका अब अंदरूनी कहानी के साथ सामने आ रहा है। पार्टी के लिए सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले नेता ही बगावत की कड़ी बन गए और पूरी रणनीति अंदर से ही लीक होती रही।

बताया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल को इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि जिन पर वह सबसे ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, वही खेल पलटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। खासतौर पर संदीप पाठक को संगठन का “चाणक्य” माना जाता था, लेकिन अंत में वही बगावत के सातवें चेहरे के रूप में सामने आए।

कैसे हुई पूरी पटकथा तैयार

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ। इसकी शुरुआत 2 अप्रैल से मानी जा रही है, जब राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य सांसदों से संपर्क शुरू हुआ।

पार्टी के अंदर गणित लगाया गया कि 10 में से कम से कम 7 सांसद साथ आए बिना दलबदल कानून से बचना संभव नहीं होगा। इसी भरोसे में पार्टी नेतृत्व आश्वस्त था कि इतनी बड़ी टूट नहीं होगी। लेकिन आखिरी समय में यही गणित उल्टा पड़ गया।

भरोसे की दीवार कैसे गिरी

बताया जाता है कि मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने केजरीवाल को भरोसा दिलाया था कि कुछ सांसद किसी भी हालत में पार्टी नहीं छोड़ेंगे। इनमें संदीप पाठक का नाम भी शामिल था।

लेकिन अंदर ही अंदर रणनीति बदल चुकी थी। आरोप है कि पार्टी की आंतरिक चर्चाओं और रणनीतियों की जानकारी लगातार बागी खेमे तक पहुंच रही थी। इससे बगावत की तैयारी बेहद संगठित तरीके से आगे बढ़ी।

24 अप्रैल: जब सब कुछ साफ हो गया

24 अप्रैल को दोपहर करीब 1:30 बजे अरविंद केजरीवाल को बगावत की खबर मिली। उन्होंने तुरंत मनीष सिसोदिया को फोन किया और बताया कि 7 सांसद अलग हो रहे हैं। जब पूछा गया “सातवां कौन?”, जवाब था—संदीप पाठक।

कुछ ही घंटों बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने बीजेपी में जाने की घोषणा कर दी और पूरा घटनाक्रम खुलकर सामने आ गया।

राजनीतिक संदेश क्या है?

यह घटनाक्रम सिर्फ संख्या का नुकसान नहीं, बल्कि भरोसे के संकट की कहानी भी है।

  • पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े हुए
  • नेतृत्व की रणनीतिक पकड़ कमजोर दिखी
  • विपक्षी राजनीति में बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका लगा

अब नजर इस बात पर है कि अरविंद केजरीवाल इस संकट से कैसे उबरते हैं और पार्टी को दोबारा संगठित कर पाते हैं या नहीं।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button