केजरीवाल की जज बदलने की मांग खारिज, कोर्ट ने निष्पक्षता पर उठे सवालों पर दी सख्त टिप्पणी

आबकारी मामले में जज बदलने की मांग को लेकर अरविंद केजरीवाल की अर्जी पर अदालत ने फैसला सुनाते हुए इसे खारिज कर दिया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने आदेश में कई अहम बातें कहीं।

कोर्ट ने साफ कहा कि केजरीवाल की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में सिर्फ गिरफ्तारी की जरूरत वाले मुद्दे को ही बड़ी बेंच के पास भेजा गया था और अंतरिम जमानत दी गई थी। उनके कोर्ट के पहले के आदेश को रद्द नहीं किया गया था।

निष्पक्षता पर उठे सवालों पर सख्त रुख
जस्टिस शर्मा ने कहा कि उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि कोई भी पक्ष सिर्फ इस आधार पर जज बदलने की मांग नहीं कर सकता कि उसे किसी तरह का “डर” है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी नेता के सार्वजनिक बयान, जैसे अमित शाह के बयान, के आधार पर अदालत से अलग होने की मांग करना पूरी तरह कल्पना पर आधारित है, क्योंकि कोर्ट नेताओं के बयानों को नियंत्रित नहीं कर सकता।

‘न्यायपालिका की संस्था को चुनौती’
जज ने कहा कि इस तरह की अर्जी न्यायपालिका की संस्था को चुनौती देने जैसी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले कई मामलों में केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेताओं को इसी कोर्ट से राहत मिली थी, तब निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए गए थे।

अन्य मामलों का भी जिक्र
कोर्ट ने संजय सिंह और मनीष सिसोदिया के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि उन मामलों में दिए गए आदेशों पर भी उच्च अदालतों ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

कुल मिलाकर, अदालत ने साफ कर दिया कि बिना ठोस आधार के जज बदलने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर इस तरह सवाल उठाना उचित नहीं है।

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