बंगाल के ‘चाणक्य’ मुकुल रॉय का निधन, लंबे समय से थे बीमार

दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘बंगाल के चाणक्य’ के नाम से पहचाने जाने वाले मुकुल रॉय का 23 फरवरी (सोमवार) की सुबह कोलकाता में निधन हो गया।

71 वर्षीय रॉय ने साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में रात करीब 1:30 बजे अंतिम सांस ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनका निधन कार्डियक अरेस्ट से हुआ। वे लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो गए थे।

रॉय ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में रहे और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते थे। 1998 में पार्टी गठन के बाद संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। अपनी राजनीतिक सूझबूझ और रणनीति के कारण उन्हें ‘चाणक्य’ की उपाधि दी गई।

उनका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वे संप्रग-2 सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री और जहाजरानी राज्य मंत्री रहे। 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता की जिम्मेदारी संभाली। 2017 में मतभेदों के चलते वे भाजपा में शामिल हुए और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद पुनः टीएमसी में लौट आए।

स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। 2023 में डिमेंशिया और पार्किंसंस की पुष्टि हुई। मार्च 2023 में हाइड्रोसेफेलस के कारण ब्रेन सर्जरी करानी पड़ी।

जुलाई 2024 में गिरने से सिर में चोट और ब्लड क्लॉट हटाने की सर्जरी के बाद उनकी हालत और बिगड़ गई थी। क्रोनिक डायबिटीज और सांस संबंधी समस्याओं ने भी उनकी सेहत को कमजोर किया। उनके निधन से बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।

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