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कांग्रेस में मणिशंकर अय्यर के बयान से सियासी घमासान

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के ताज़ा बयान से पार्टी के भीतर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अय्यर ने पार्टी नेतृत्व, आधिकारिक प्रवक्ता पवन खेड़ा और केरल में कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं पर खुलकर सवाल उठाए हैं।

“ऐसी पार्टी को कौन वोट देगा?”

ANI से बातचीत में अय्यर ने कहा कि जिस पार्टी में नेता आपस में ही उलझे हों, उसे जनता क्यों वोट देगी? उन्होंने केरल की राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि वहां की पिनाराई विजयन सरकार में कम से कम अनुशासन तो दिखाई देता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “उनके पास कोई मणिशंकर अय्यर नहीं है।”

पवन खेड़ा पर तीखा हमला

अय्यर ने कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि उनके मन में खेड़ा के लिए “कोई सम्मान नहीं” है। इस बयान ने पार्टी के भीतर असहजता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सीधा हमला आधिकारिक प्रवक्ता पर है।

नेहरू, गांधी और सुभाष बोस का उदाहरण

अय्यर ने अपने “बागी” स्वभाव को सही ठहराने के लिए ऐतिहासिक उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि

•जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी के खिलाफ बागी रहे,

•सुभाष चंद्र बोस भी गांधी से मतभेद रखते थे,फिर भी लोकतांत्रिक परंपरा कायम रही।

उन्होंने कहा कि अगर बोस 17 अगस्त 1945 के विमान हादसे में बच जाते, तो वे भारत के राष्ट्रपति बन सकते थे। अय्यर का तर्क था कि पहले मतभेदों को अलग तरीके से संभाला जाता था, जबकि आज पार्टी नेतृत्व आलोचना को स्वीकार करने में कमजोर दिखता है।

INDIA ब्लॉक और एमके स्टालिन पर भरोसा

अय्यर ने कहा कि अगर INDIA गठबंधन को मजबूत करना है तो इसके लिए एम के स्टालिन सबसे उपयुक्त व्यक्ति हो सकते हैं।

उन्होंने स्टालिन की तुलना कामराज से करते हुए कहा कि स्टालिन नारेबाज़ी नहीं, बल्कि संघीय ढांचे (फेडरलिज़्म) के मुद्दे उठाते हैं।

अय्यर ने यह भी कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि कोई नेता पूरी तरह INDIA ब्लॉक को मजबूत करने में जुटे।

राजनीतिक असर

अय्यर के इन बयानों से कांग्रेस के भीतर आंतरिक मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। ऐसे समय में जब पार्टी आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है, वरिष्ठ नेता का यह सार्वजनिक बयान संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।

अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है और क्या पार्टी इस बयान से उत्पन्न असंतोष को शांत कर पाती है या नहीं।

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