छत्तीसगढ़: 2018 से 2023 तक घोटालों और ठहराव में उलझा रहा प्रदेश, अब बघेल का ‘नाकेबंदी’ आह्वान चर्चा में

रायपुर।2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ की राजनीति में काफी उथल-पुथल देखने को मिली। भूपेश बघेल की अगुवाई में कांग्रेस सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। इन पांच सालों में राज्य में कई बड़े घोटाले सामने आए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहा करीब ₹2,000 करोड़ का शराब घोटाला। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई खुलासे किए और एक आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश किया, जो सरकारी तंत्र और राजनीतिक समर्थन से लोगों के स्वास्थ्य और सरकारी खजाने से खिलवाड़ कर रहा था।

हालाँकि छत्तीसगढ़ के पास खनिज और कृषि की अच्छी खासी क्षमता है, लेकिन कांग्रेस सरकार कोई बड़ा औद्योगिक निवेश नहीं ला सकी। रोजगार के मौके बढ़ने की बजाय घटे, युवा बेरोजगारी से परेशान रहे और बुनियादी विकास भी ठप सा हो गया। पांच साल में न तो कोई बड़ा निवेशक सम्मेलन हुआ और न ही कोई ठोस योजना दिखी।

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अब जब बघेल सरकार पर ED की कार्रवाई तेज़ हुई है, तो कांग्रेस ने इसके जवाब में बीजेपी पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इसी बीच चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के विरोध में भूपेश बघेल ने 22 जुलाई को कुछ संभागों में आर्थिक नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। लेकिन इस कदम पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इससे व्यापार, आपातकालीन सेवाओं और छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शासन कोई नाटक करने की जगह नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी का काम है। लोगों को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो विकास को प्राथमिकता दें, न कि ध्यान भटकाने वाले फैसले लें। अब समय आ गया है कि कानून का राज कायम हो, भ्रष्टाचारियों को सज़ा मिले और छत्तीसगढ़ के लोग एक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ें।

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