रायपुर की स्लम बस्तियों का धरावी मॉडल पर पुनर्विकास, 4,044 ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाने पर 232 करोड़ खर्च

राजधानी रायपुर की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में मुंबई की धारावी झुग्गी-बस्ती के पुनर्विकास मॉडल को अपनाते हुए स्लम क्षेत्रों का यथास्थान पुनर्निर्माण किया जाएगा। यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप मॉडल में प्रस्तावित की गई है।
योजना के अनुसार डगनिया, आमापारा, अमरपुरी, भीम नगर और उत्कल नगर सहित प्रमुख स्लम बस्तियों में बहुमंजिला ईडब्ल्यूएस आवासों का निर्माण किया जाएगा। करीब 19.19 हेक्टेयर शहरी भूमि पर जी-6 और जी-8 श्रेणी की इमारतें बनाई जाएंगी, जिनमें कुल 4,044 ईडब्ल्यूएस फ्लैट प्रस्तावित हैं। इस पूरी परियोजना पर लगभग 232 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन शासन को भेज दिया गया है।
धरावी मॉडल के तहत स्लम क्षेत्र की भूमि का एक हिस्सा पात्र स्लमवासियों को निशुल्क पक्का मकान देने के लिए उपयोग होगा, जबकि शेष भूमि निजी डेवलपर को व्यावसायिक उपयोग के लिए दी जाएगी। इसके बदले डेवलपर आवास निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी निभाएगा। इसी तर्ज पर रायपुर में भी पात्र परिवारों को पक्का आवास, सड़क, सीवरेज, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
डगनिया बस्ती नालों के बीच बसी घनी आबादी वाली बस्ती है, जहां जलभराव, गंदगी और संकरी गलियों की समस्या बनी रहती है। आमापारा क्षेत्र पुराने और जर्जर मकानों, पेयजल और ड्रेनेज संकट से जूझ रहा है। अमरपुरी में नालों के किनारे बसी आबादी को गंदे पानी से स्वास्थ्य जोखिम है। भीम नगर में अस्थायी निर्माण, अवैध बिजली कनेक्शन और तंग रास्ते प्रमुख समस्या हैं, जबकि उत्कल नगर शहर के बीच स्थित होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।
इस योजना के तहत इन सभी बस्तियों का उसी स्थान पर पुनर्विकास किया जाएगा, ताकि निवासियों को विस्थापन की समस्या न हो। परियोजना की स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
नगर निगम का कहना है कि इस योजना से स्लमवासियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलेगा। वहीं विपक्ष का आरोप है कि निजी डेवलपरों को लाभ पहुंचाने की आड़ में यदि गरीबों के अधिकारों से समझौता हुआ तो इसका विरोध किया जाएगा।





