मां-बेटी का भविष्य अधर में: जेल लौटी मुस्कान, DNA रिपोर्ट तय करेगी बैरक का साथ

पति की हत्या के आरोप में मेरठ की जेल में बंद मुस्कान को मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज के बाद फिर से महिला बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है. सामान्य प्रसव से जन्मी नवजात बेटी ‘राधा’ भी फिलहाल मां के साथ ही बैरक नंबर 12A में रखी गई है. मां-बेटी पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही हैं, लेकिन बच्ची का भविष्य बड़ा सवाल बन गया है. जेल प्रशासन ने साफ किया है कि अब तक DNA टेस्ट के लिए किसी भी पक्ष से कोई औपचारिक, लिखित अनुरोध नहीं मिला है, इसलिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती. पिता के दावे, पारिवारिक हक और जेल में मां-बेटी के एकसाथ रहने को लेकर अंतिम फैसला DNA जांच और कोर्ट के निर्देश पर ही निर्भर करेगा.
बुधवार को मुस्कान को सख्त सुरक्षा के बीच मेडिकल कॉलेज से जेल लाया गया. जेल अधीक्षक ने बताया कि बैरक 12A में पहले से कई महिला बंदी अपने छोटे बच्चों के साथ रह रही हैं, ऐसे में मुस्कान और राधा के लिए भी वहीं रहने की व्यवस्था की गई है. गुरुवार को बच्ची का जेल परिसर में ही टीकाकरण किया जाएगा. हालांकि सुरक्षा कारणों से मुस्कान को दूसरे बंदियों या बाहरी व्यक्तियों से लंबे समय तक मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही. महिला बंदियों ने बैरक में पहुंचते ही मुस्कान को बेटी के जन्म पर बधाई और शुभकामनाएं दीं, जिससे कुछ देर के लिए माहौल भावुक और मानवीय दिखा, लेकिन बच्ची से जुड़े कानूनी और नैतिक सवाल अब भी अनसुलझे हैं.
यह केस वर्ष 2020 बैच के अन्य पुलिस भ्रष्टाचार मामलों की तरह चर्चा में नहीं, बल्कि अपनी जघन्य आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण सुर्खियों में है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 3 मार्च की रात ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल पर पति ‘सौरभ’ की हत्या का आरोप लगा. आरोपपत्र में कहा गया कि शव के चार टुकड़े किए गए, सीमेंट से सील कर नीले ड्रम में भर दिया गया और इसके बाद आरोपी हिमाचल घूमने निकल गए. 17 मार्च को दोनों लौटे, 19 मार्च को गिरफ्तारी हुई और हत्याकांड सामने आया. तब से यह मामला कोर्ट में लंबित है.
नवजात का बैरक में साथ रहना केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि जेल मैनुअल, चाइल्ड राइट्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है. बाल संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध की गंभीरता और माता-पिता की कानूनी स्थिति के बीच संतुलन बनाकर ही बच्ची के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है. प्रशासन का कहना है कि कोर्ट या परिवार से प्रक्रिया संबंधी स्पष्ट, लिखित मांग और दिशा-निर्देश मिलते ही DNA जांच और सेफ-करेज व्यवस्था पर काम शुरू किया जाएगा. फिलहाल फैसला जांच, कानूनी निर्देश और DNA नतीजों की प्रतीक्षा में अटका हुआ है, जो तय करेगा कि बच्ची की परवरिश किस छत के नीचे, किस माहौल में होगी. (शब्द: ~350)





