नदियों में गिर रहे गंदे नालों पर सरकार सख्त, नगरीय निकायों से मांगी पूरी रिपोर्ट

राज्य सरकार ने प्रदेश की प्रमुख नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सभी नगरीय निकायों से विस्तृत जानकारी मांगी है। नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अधिकारियों को पत्र भेजकर उनके क्षेत्र में नदियों में गिरने वाले नालों और गंदे पानी की स्थिति पर जवाब तलब किया है।
निकायों को यह बताना होगा कि उनके क्षेत्र में संबंधित नदी में कितने नाले गिरते हैं, उनकी कुल लंबाई कितनी है और प्रतिदिन कितना गंदा पानी नदी में मिल रहा है। इसके साथ ही यह भी जानकारी देनी होगी कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट कब स्थापित किया गया, उसकी क्षमता कितनी है और भविष्य में कितनी अतिरिक्त क्षमता की जरूरत है।
नदी पुनर्जीवन समिति की बैठक में सामने आया कि महानदी, अरपा, खारुन, केलो, शिवनाथ और हसदेव नदियों के किनारे लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। इसके कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का गंदा पानी बिना शोधन के सीधे नदियों में पहुंच रहा है, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
राजधानी रायपुर में खारुन नदी के किनारे कारा, निमोरा और चंदनीडीह में स्थापित प्लांटों की कुल क्षमता करीब 200 एमएलडी है, जबकि भाठागांव एनीकट के पास 6 एमएलडी का अतिरिक्त प्लांट लगाया गया है। प्रदेशभर में वर्तमान में 18 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 408 एमएलडी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में इन नदियों में प्रदूषण का स्तर अधिक बताया गया है।
नदियों के पानी का उपयोग पीने के लिए होने के कारण उनका स्वच्छ रहना बेहद जरूरी है। रायपुर में प्रतिदिन लगभग 300 एमएलडी पानी की जरूरत होती है, जो खारुन नदी से लिया जाता है। प्रदूषण बढ़ने पर पानी को शुद्ध करने में अधिक खर्च आता है, जिससे निकायों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त जानकारी के आधार पर नालों से निकलने वाले गंदे पानी और मौजूदा प्लांटों की क्षमता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद जहां जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे, ताकि नदियों को प्रदूषण से मुक्त किया जा सके और लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।





