डेटा फर्जीवाड़ा: 5 हजार में बिक रहा था 1 लाख लोगों का निजी मोबाइल डेटा लोन दिलाने के नाम पर सक्रिय था गिरोह,
आईजी तक पहुंची कॉल तो खुला राज

बिलासपुर में डेटा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। (डेटा फर्जीवाड़ा) यहाँ महज 5 हजार रुपये में एक लाख लोगों का मोबाइल डेटा बेचा जा रहा था। लोन दिलाने के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ, जब आरोपियों द्वारा किया गया एक कॉल खुद बिलासपुर आईजी रामगोपाल गर्ग तक पहुंच गया.
आईजी तक पहुंची कॉल तो खुला राज (डेटा फर्जीवाड़ा)
बिलासपुर के अग्रसेन चौक स्थित ‘ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेस’ के नाम से चल रहे एक संगठित डेटा फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में संचालिका उषा कश्यप, अमन राठौर और शेख जुनैद खान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी विभागों, ऑनलाइन डायरेक्टरी और घर-घर जाकर लोगों के निजी मोबाइल नंबर जुटाते थे।
इसके बाद इन नंबरों का एक डेटाबेस तैयार कर उसे व्यावसायिक लाभ के लिए बेचा जा रहा था। आईजी रामगोपाल गर्ग के पास जब लोन ऑफर की कॉल पहुंची, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। आईजी की सक्रिय निगरानी के बाद पुलिस ने दबिश दी और इस रैकेट का पर्दाफाश किया.
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी अमन राठौर ने करीब एक लाख मोबाइल नंबरों का डेटा मात्र 5 हजार रुपये में खरीदा था, जिसे वह आगे सप्लाई कर रहा था। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच करा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह डेटा और किन-किन लोगों को बेचा गया है।
इस पूरे मामले पर पुलिस का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नागरिक की निजता से खिलवाड़ और अवैध डेटा संग्रहण एक गंभीर अपराध है, जिसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी या दस्तावेज साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें





