कौन थी वो रानी, जो बनी बस्तर की पहली महिला शासिका

रायपुर। बस्तर रियासत की स्थापना काकतीय राजवंश के राजा अन्नाम देव ने 1324 ई में की थी.. जिसके बाद से बस्तर में काकतीय राजवंश का ही शासन रहा.. वहीं 1947 ई तक बस्तर में काकतीय राजवंश के 20 राजा हुए.. लेकिन 19 पीढ़ी में कोई राजा नहीं बल्कि रानी ने यहां शासन किया.. जिनका नाम था महारानी प्रफुल्ल कुमारी.. जिन्हें न सिर्फ बस्तर की  बल्कि पुरे छत्तीसगढ़ की महिला शासिका होने का दर्जा मिला..

महारानी प्रफुल्ल कुमारी राजा रूद्रप्रतापदेव और रानी कुसुमलता की बेटी थी… प्रफुल्ल कुमारी का जन्म 1910 ई में हुआ था… इनके जन्म के दो साल बाद ही उनकी मां रानी कुसुमलता की मृत्यु हो गई.. जिसके बाद उनका उनका ध्यान उनकी सौतेली मां चंद्रकुमारी देवी ने किया.. वहीं सन 1921 में राजा रूद्र्प्रताप देव की अचानक मृत्यु हो गई.. उस समय राजकुमारी की उम्र 11 साल थी.. जिसके बाद बस्तर के नए शासक के लिए सवाल उठने लगे.. क्योंकि राजा रुद्रप्रताप का कोई पुत्र नहीं था..

इसके बाद बस्तर के सारे आदिवासी, राजमहल के सामने इक्कट्ठा हो गए.. और राजकुमारी को सिंहासन सौंपने की मांग करने लगे.. वहीं आदिवासियों ने ये तक कह दिया कि राजा का अंतिम संस्कार तभी होगा.. जब राजकुमारी प्रफुल्ला सिंहासन पर बैठेगी… जिसके बाद महज़ 11 साल की उम्र में राजकुमारी प्रफुल्ला, बस्तर की रानी बन गई.. .. वहीं ब्रिटिश सरकार में ये भारत पहली बार हुआ था कि किसी राजकुमारी को राजसिंहासन सौंपा गया हो…

इसके बाद 1927 में महारानी का विवाह में मयुरभंज के राजपरिवार के प्रफुल्लचंद भंजदेव के साथ हुआ.. और साल 1933 ई में अंग्रेजी सरकार ने रानी प्रफुल्लकुमारी की उपाधि बढ़ाकर उन्हें महारानी की उपाधि दे दी.. इसके महाराजा प्रफुल्लचंद भंजदेव और महारानी प्रफुल्लकुमारी को दो पुत्र और दो पुत्रियां हुई.. जिसमें प्रवीरंचद्र भंजदेव आगे चल के  बस्तर के रियासत महाराज बने..

वहीं महारानी प्रफुल्लकुमारी, पहली महिला शासिका तो थी ही.. लेकिन वो बस्तर की पहली ऐसी शासक भी थी..जिसने वायसराय से मुलाकात की थी… उन्होने वायसराय के सामने बस्तर की कई समस्याओं को रखा था… वो बस्तर के लोगों का विकास चाहती थी.. जिसके बाद जगदलपुर में अस्पताल का निर्माण कराया गया.. जिसे महारानी प्रफुल्ल कुमारी के नाम पर ही महारानी नाम दिया गया.. वो बस्तर की सबसे लेकप्रिय रानी थी..बस्तर के लोग उन्हें प्यार से “बाबी ढाणी कहते थे..

वहीं अंग्रेजी सरकार ने उन्हें रानी से बढ़ाकर महारानी की उपाधि ऐसे ही नहीं दी थी.. ये अंग्रेजों की एक साजिश थी.. क्योंकि वे बैलाडीला जो कि विश्व स्तरीय अयस्क के लिए प्रसिद्ध है.. इसे हैदराबाद के निज़ाम को बेचना चाहते थे.. जिसके लिए  रानी और राजा प्रफुल्ल चंद्र को खुश करके अपने पक्ष में करने की कोशिश की.. लेकिन रानी उनके विचार से सहमत नहीं थी… इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने राजा और रानी को मिलने वाली प्रिवी पर्स में कटौती कर दी…

इसके कुछ समय बाद अंग्रेजों ने यह घोषणा की कि रानी को अपेंडिसाइटिस है और उनका इलाज लंदन में हो सकता है.. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए लंदन भेजा गया और रानी के डॉक्टर को एक गुप्त पत्र भेजा गया.. जिसमें कहा गया कि रानी लंदन से जीवित बस्तर वापस नहीं आ पाएंगी.. और रानी की हत्या कर दी गई.. जिसे लेकर ये अंदेशा लगाया गया कि इसमें ब्रिटिश सरकार का ही हाथ था… खैर बस्तर के लोग आज भी उन्हें याद करते हैं.,.वहीं महारानी अस्पताल में उनकी प्रतिमा भी स्थापित है और इलाज के लिए आने वाले आदिवासी आमतौर पर उस प्रतिमा को प्रणाम करके लौटते हैं…

 

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