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बिलासपुर हाईकोर्ट से आबकारी घोटाले में बड़ी राहत, टुटेजा-ढेबर समेत 5 को जमानत

बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने लंबे समय से जेल में बंद आबकारी घोटाले के आरोपियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, नितेश पुरोहित, यश पुरोहित और दीपेंद्र चावला को जमानत प्रदान की है।

इस मामले में आरोपियों की ओर से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने पैरवी की।

3200 करोड़ के आबकारी घोटाले का मामला

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान कथित 3200 करोड़ रुपए के आबकारी घोटाले का खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, शराब नीति में बदलाव कर और नकली होलोग्राम के जरिए चुनिंदा सप्लायरों को लाभ पहुंचाते हुए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की गई।

आरोप है कि नकली होलोग्राम लगी शराब की बोतलें सरकारी दुकानों से बेची गईं, जिससे शासन को करीब 2165 करोड़ रुपए के एक्साइज टैक्स का नुकसान हुआ।

इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर समेत कई अधिकारियों और कारोबारियों को आरोपी बनाया गया था।

पहले खारिज हो चुकी थी जमानत

सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट से पहले जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से भी राहत नहीं मिली। हालांकि पांच माह बाद पुनः हाईकोर्ट में जमानत लगाने की अनुमति दी गई थी।

ताजा सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पांच आरोपियों को जमानत दे दी है।

जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे टुटेजा-ढेबर

हालांकि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को 550 करोड़ रुपए के कथित DMF घोटाले में भी आरोपी बनाया गया है। इस मामले में जमानत नहीं मिलने के कारण वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।

वहीं नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित के जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है शराब घोटाला?

2019 से 2023 के बीच कथित तौर पर शराब नीति में बदलाव कर लाइसेंस शर्तें ऐसी बनाई गईं, जिससे चुनिंदा कंपनियों को लाभ मिले। नकली होलोग्राम और सील के जरिए महंगी शराब की बिक्री सरकारी दुकानों से करवाई गई। नकली होलोग्राम के कारण बिक्री का रिकॉर्ड शासन तक नहीं पहुंचा और बिना टैक्स दिए शराब बेची जाती रही।

मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल सहित कई अन्य नाम भी जांच में सामने आए थे।

अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले में कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

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