भूपेश के घर ED के छापे में क्या मिला? इनसाइड स्टोरी …

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई स्थित आवास पर सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 घंटे तक चली छापेमारी में कई अहम वस्तुएँ बरामद कीं। इस कार्रवाई में 33 लाख रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, एक पेन ड्राइव और कई दस्तावेज जब्त किए गए। ईडी की यह जाँच कथित शराब घोटाले से जुड़ी है, जिसमें भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर भी संदेह है। छापेमारी के बाद शुरू हुए राजनीतिक विवाद ने राज्य में सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।
ईडी की टीम सुबह 7:30 बजे पद्मनगर स्थित बघेल के घर पहुँची। तलाशी के दौरान करीब 33 लाख रुपये नकद बरामद हुए। भूपेश बघेल ने इसे अपने संयुक्त परिवार की खेती, डेयरी और स्त्रीधन से जोड़ा, दावा करते हुए कि यह राशि घोषित है और इसका हिसाब दिया जा सकता है। नकदी की गिनती के लिए ईडी ने दो नोट गिनने की मशीनें मंगवाईं, जिस पर बघेल ने तंज कसा कि ईडी को लगा होगा कि यहाँ अरबों रुपये मिलेंगे।
छापेमारी का सबसे चौंकाने वाला पहलू एक पेन ड्राइव का मिलना रहा। सूत्रों के अनुसार, इसमें मंतूराम नामक व्यक्ति और डॉ. पुनीत गुप्ता (पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद) के बीच कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेन-देन की बातचीत दर्ज है। इसके अलावा, रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह की सेल कंपनी से संबंधित कागजात भी जब्त किए गए। बघेल ने कहा, ईडी की हर फाइल में रमन सिंह का नाम देखकर उनके हाथ काँपने लगे। हालाँकि, बीजेपी ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक स्टंट बताया।
छापेमारी खत्म होने के बाद कांग्रेस समर्थकों ने ईडी टीम के खिलाफ प्रदर्शन किया। भीड़ ने गाड़ियों पर पथराव किया, जिससे एक डिप्टी डायरेक्टर की कार का शीशा टूट गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। ईडी ने इस घटना की शिकायत दर्ज करने की बात कही है।
बघेल ने इस छापेमारी को बीजेपी की बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा, मैंने विधानसभा में गरीबों के लिए हाउसिंग स्कीम पर सवाल उठाया, और चौथे दिन ईडी मेरे घर पहुँच गई। कांग्रेस ने इसे संसद के बजट सत्र से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया। उधर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, यह केंद्रीय एजेंसी की स्वतंत्र जाँच है। कांग्रेस शासनकाल के घोटालों की सजा अब भुगतनी पड़ रही है।





