budget : बजट आखिर होता क्या है? संविधान में नहीं है बजट शब्द का उल्लेख

budget : आज देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार अपना आठवां बजट पेश किया है, जिसे बनाने में 6 महीने का समय लगा और 40 दिन का एक पूरा संसद सत्र बजट के नाम होता है। लेकिन आज पूरे देश भर में जिस बजट की बात हो रही है, वह आखिर होता क्या है? चलिए, इसे हम एक आसान उदाहरण से समझते हैं।
मान लीजिए आपके घर में एक डायरी है, जिसमें पूरा हिसाब-किताब होता है। और फिर साल के आखिर में जब हम उसे देखते हैं, तो हमें यह पता चलता है कि हमारा घर कैसे चला, हमने कहां खर्च किया, कितना कमाया, कितना बचाया? इस हिसाब से फिर हम तय करते हैं कि हमें अगले साल में किस तरह खर्च करना है, बचत कितनी करनी है, और हमारे खर्च और बचत का संतुलन कैसा रहेगा।
ठीक वैसे ही, सरकार का बजट भी होता है। यह सरकार के जमा और खर्च का हिसाब-किताब है, जिसमें यह बताया जाता है कि सरकार को पैसा कहां से आएगा और कहां खर्च होगा। इसे सरकार की आर्थिक स्थिति को जानने और सुधारने का एक अहम तरीका माना जाता है।
अब, बजट बनाने का तरीका कोई बहुत जटिल नहीं है। बस इसमें यह ध्यान रखा जाता है कि सरकार के पास दो जेबें होती हैं – रेवेन्यू और कैपिटल। इन दोनों जेबों में पैसा कैसे आएगा और कहां जाएगा, इसका पूरा लेखा-जोखा बजट में होता है।
आपको यह जानकर भी हैरानी हो सकती है कि हमारे संविधान में बजट का शब्द कहीं नहीं है! सरकारी भाषा और संविधान में इसे एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट कहा जाता है। यानी, यह वह दस्तावेज है जिसमें सरकार अपना सालाना जमा और खर्च का हिसाब देती है, ताकि हमें यह पता चले कि आने वाले समय में देश की वित्तीय स्थिति कैसी रहेगी।
इसलिए, बजट हर साल आता है, और यह हमारे देश की आर्थिक दिशा और सरकार की वित्तीय नीति को समझने का एक अहम जरिया है।