क्या है फायर चीटीं, जिसके काटने से गई बच्ची की जान

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं एक चीटीं आपकी जान ले सकती है… जी हां आप भी सोच में पड़ गए न कि भला एक चीटी कैसे किसी जान ले सकती है.. लेकिन मैं किसी आम चीटी की बात नहीं कर रही.. मैं बात कर रही हुं फायर चीटी की…

ये चीटीं भले दिखने में बेहद छोटी हो.. लेकिन इसका डंक आपकी जान भी ले सकता है.. दरअसल ये चीटी काटते वक्त सोले-नोप्सिन नामक ज़हर छोड़ती हैं जिससे खुजली, तेज जलन और दर्द होता है..कई बार सफेद फुंसी भी निकल आते हैं…जिसके चलतो इसे फायर चीटी कहा जाता है… इसके अलावा जिन लोगों को किसी तरह की एलर्जी होती है.. उनके लिए ये जानलेवा भी साबित हो सकता है….और ये चींटियां एक ही बार में कई बार डंक मार सकती हैं…

वहीं इस चीटी से मौत का एक मामला अमेरीका के जॉर्जिया से सामने आया है, जहां 2 साल की मासूम बच्ची माया गेटाहुन की मौत फायर चींटियों के काटने से हुई एलर्जी के कारण हो गई. बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी तभी इन खतरनाक चींटियों ने उस पर हमला कर दिया. हालात बिगड़ने पर परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन समय पर इलाज न मिलने की वजह से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. अब इस मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

माया के माता-पिता बेथेलहेम गेटू हंडी और गेटहुन बिरहानु ने स्नेलविले स्थित पीडमोंट ईस्टसाइड मेडिकल सेंटर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है. उनका दावा है कि अस्पताल स्टाफ ने जीवन रक्षक दवा एपिनेफ्रीन देने में 20 मिनट से ज्यादा देर कर दी. जबकि इस दवा को तुरंत देने की सख्त जरूरत थी, जिससे माया की जान बचाई जा सकती थी. हालांकि, यह मामला 7 अक्टूबर 2024 को हुआ था.

वकीलों द्वारा दायर मुकदमे में कहा गया है कि स्टाफ को पता था कि माया को एनाफिलैक्सिस (एलर्जी की गंभीर अवस्था) हो रही है फिर भी उन्होंने इलाज में देरी की. साथ ही माया का इलाज कर रही डॉक्टर पर यह आरोप भी लगा कि उन्हें पता ही नहीं था कि अस्पताल में उस समय ज़रूरी उपकरण मौजूद नहीं थे.

माया के माता-पिता ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को ऑक्सीजन की कमी से धीरे-धीरे मरते देखा और कुछ नहीं कर सके. वे अदालत से 10,000 डॉलर हर्जाना और जूरी ट्रायल की मांग कर रहे हैं.

 

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