सबसे बड़े नक्सली ऑपरेशन में क्या- क्या हुआ? जानिए पुरी अपडेट

रायपुर।  पिछले 9 दिनों से बीजापुर के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर सुरक्षाबल नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन, ऑपरेशन कगार चला रहे हैं.. जिसे लेकर ये कहा जा रहा है कि ये नक्सलियों के खिलाफ आखिरी जंग है.. क्योंकि इस ऑपरेशन में नक्सलियों के सबसे बड़े लीडर्स शामिल है.. जिनके पकड़े या ढेर होने के बाद शायद छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म हो जाए..

इसके चलते लगातार सुरक्षाबल 9 दिनों से नक्सलियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन भी चला रही है.. जिसमें नक्सलियों  के बिछाए 100 से भी ज्यादा IED बम को बरामद कर सुरक्षाबलों ने नष्ट कर दिया है.. वहीं दो दिन पहले सुरक्षाबलों को बियर बम भी मिले थे.. ये IED बम थे.. जो बियर की बॉटल से बनाए गए थे.. इसके अलावा अब तक इस मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे भी जा चुके हैं.. वहीं अब सुरक्षाबलों ने अपनी कार्रवाई और भी तेज़ कर दी है..

सुरक्षाबलों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर पुरी तरह कब्जा कर लिया है.. और अपनी संख्या भी बढ़ा दी है.. वहीं आज 9वें दिन 500 और जवानों को हेलीकॉप्टर के जरिए पहाड़ी पर उतारा गया, जिसका वीडियो भी सामने आया है… पहले इस ऑपरेशन में सिर्फ छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स शामिल थी..  वहीं अब बिहार और झारखंड के सेंट्रल सुरक्षाबल के जवानों की भी कर्रेगुट्टा पहुंच गए हैं.. और लगातार सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है..

इससे नक्सली डरे हुए.. लगातार वो पत्र जारी कर युध्द रोकने की मांग कर रहे हैं..  28 अप्रेल को भी नक्सलियों के केंद्रिय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने एक पत्र जारी कर इस ऑपरेशन को रोकने की मांग की.. साथ ही आरोप लगाया कि इस ऑपरेशन के नाम पर निर्दोष आदिवासियो की हत्या की जा रही है.. इसके साथ ही तेलंगाना के पुर्व CM ने भी इस ऑपरेशन को नरसंहार बताते हुए ऑपरेशन रोकने की मांग की..

इसके बाद तेलंगाना शांतिवार्ता के सदस्यों ने तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी से भी मुलाकात की और नक्सलियों और सरकार के बीच शांतिवार्ता करने और ऑपरेशन को तत्काल रोकने के लिए उन्होने मांग की..  इसके बाद सीएम ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वो पार्टी के बड़े नेताओं से चर्चा कर इस मामले में पहल करेंगे..

लेकिन अब इस ऑपरेशन ने नया मोड़ ले लिया है और छत्तीसगढ़  में भी पॉलीटिकल को जंग छेड़ दिया है..क्योंकि इस ऑपरेशन का मुख्य बिंदु हिड़मा भाग गया है…  जी हां.. सुत्रो से जो जानकारी मिली है. वो इस ओर इशारा करती है कि हिड़मा करेंगुट्टा पहाड़ी से उतरकर भाग चुका है.. वहीं  बता दें कि पिछले पांच दिनों में पहाड़ के ऊपर नक्सलियों की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई है… इसके अलावा जो आईईडी ब्लास्ट भी हुए हैं.. वो भी पहाड़ के निचले हिस्से में ही थे.. वहीं, तेलंगाना की ओर से घेराव कमजोर होने के कारण हिड़मा तेलंगाना के जंगलों में उतर गया और मौके से फरार हो गया है।

जिसे लेकर अब प्रदेश में पॉलटिकल बहस छिड़ गई है,…  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल ऑपरेशन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कि, कर्रेगट्टा पहाड़ में अभी कितने नक्सली है? और कितने नहीं है.. और अगर नहीं है तो निकल कैसे गए? अभी तक एक भी नक्सली का वीडियो फुटेज क्यों नहीं दिखा? कहीं ऐसा तो नहीं की सरकार ने फर्जी सूचना पर जवानों को झोंक दिया है?

इसके साथ ही उन्होने शांति वार्ता के लिए लिखे जा रहे पत्रों पर भी सवाल करते हे कहा, हम भी चाहते हैं कि, की नक्सलवाद खत्म हो लेकिन सरकार को हमारे सवालों का जवाब देना होगा…

वहीं डिप्टी cm मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों से शांति वार्ता की पहल को लेकर कहा कि आखिर ये लोग होते कौन है? कौन है ये लोग, दाल में जरूर कुछ काला है। नक्सली बताएं उनकी तरफ से कौन बात करेंगे? बस्तर में कई बड़ी घटनाएं हुई तब कहां थे? कई बड़े हमले के बाद वार्ता के लिए क्यों नहीं आए? कई ग्रामीण और कई नेता मारे तब क्यों नहीं आए? वहीं उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मारे गए तो पीड़ा नहीं हुई..  लेकिन आज कार्रवाई में उनके सभी बड़े लीडर्स फंसे हुए हैं और अपनी जान बचाने के लिए अब शांति वार्ता की बात हो रही हैं…

 

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