पश्चिम एशिया संकट: भारतीय जहाजों को होर्मुज से मिलेगा ‘सेफ पैसेज’! ईरान ने दिया सुरक्षा का आश्वासन

  दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को गुजरने की अनुमति मिल गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ईरान ने सुरक्षित मार्ग का आश्वासन दिया है।

जयशंकर की कूटनीति लाई रंग

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच तीन बार फोन पर चर्चा हुई है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसके बाद मंगलवार देर रात ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिलाया। हालांकि, आधिकारिक तौर पर ईरान ने किसी विशेष समझौते से इनकार करते हुए इसे ‘संवेदनशील’ बताया है, लेकिन जमीन पर इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं।

मुंबई पहुंचा युद्ध के बाद पहला कच्चा तेल वाहक

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद गुरुवार को सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर लाइबेरिया के ध्वज वाला एक जहाज सफलतापूर्वक मुंबई पहुंचा। होर्मुज जलमार्ग के रास्ते भारत पहुंचने वाला यह पहला बड़ा कच्चा तेल वाहक है। इसके अलावा दो अन्य विदेशी जहाज भी इसी मार्ग से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह मार्ग?

भारत अपनी जरूरत का 86% कच्चा तेल और 60% गैस आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। युद्ध की वजह से यह मार्ग लगभग बाधित था, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा था। वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 70% हिस्सा गैर-होर्मुज मार्गों से पूरा कर रहा है, लेकिन मुख्य मार्ग का खुलना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत है।

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