साय सरकार में जलसंकट से जूझ रहे राजधानी-न्यायधानी से लगे गांव,झीरिया का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

प्रदेश में 80 हजार करोड़ की जल योजनाएं, फिर भी गांवों में जलसंकट

रायपुर/ बिलासपुर। साय सरकार में राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर से लगे गांवों में ग्रामीणाें का पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण जलसंकट की समस्या से जूझ रहे है। राज्य सरकार के निर्देश पर विभागीय अधिकारियों ने करोड़ो की योजनाएं बनाई है, लेकिन धरातल में इनका सही क्रियान्वन नहीं होने से ग्रामीण परेशान हो रहे है। ग्रामीणों ने पानी ना मिलने की शिकायत स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की है। अब देखना यह है, कि पीड़ितों की पानी की समस्या का समाधान कब होगा।

रायपुर से लगे गांवों में एक बोर के सहारे ग्रामीण

राजधानी रायपुर से महज 20 किमी दूर स्थित उरला-सिलतरा के पास का पठारीडीह गांव भीषण जलसंकट का सामना कर रहा है। 1,375 की आबादी वाले इस गांव में पानी के लिए केवल एकमात्र बोर है। प्रत्येक परिवार को मुश्किल से दो गुंडी पानी मिल पाता है, जिससे पीने से लेकर निस्तारी तक का काम चलाना पड़ता है। फैक्ट्री के रासायनिक अपशिष्ट के कारण तालाब का पानी भी जहरीला हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि नई पीढ़ी गांव छोड़ चुकी है और शादी-ब्याह भी पानी की समस्या के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

फैक्ट्री का एसिड पानी में मिला, जलजीवन मिशन अधूरा

गांव की सरपंच सावित्री निषाद ने बताया कि आशुतोष इंजीनियरिंग नामक फैक्ट्री के कारण बोरवेल का पानी भी प्रदूषित हो गया है। गांव में जलजीवन मिशन के तहत टंकी बनी है, नल लगाए गए हैं, लेकिन पिछले चार साल से वह चालू नहीं हुई। प्रशासन को शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।

झिरिया का गंदा पानी पीने को मजबूर बैगा आदिवासी

बिलासपुर जिले के कोटा तहसील के आदिवासी गांवों में जलसंकट और भयावह है। मोहली ग्राम पंचायत के छपरापारा व बगबूड़ गांवों में कुएं और हैंडपंप सूख चुके हैं। यहां बैगा आदिवासी महिलाएं झिरिया (छोटी जलधारा) का गंदा पानी कपड़े से छानकर पी रही हैं। 70 वर्षीय बजरहीन बैगा बताती हैं कि शादी के बाद से हर गर्मी ऐसे ही बीतती है। पहली बार अप्रैल में ही कुआं सूख गया है और अब सिर्फ झिरिया का सहारा है। प्रदेश में 80 हजार करोड़ से अधिक की जल योजनाएं चल रही हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति गांवों में अलग ही तस्वीर दिखा रही है। जरूरतमंद ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने लिया है स्वत: संज्ञान

हाईकोर्ट ने भीषण गर्मी में जल संकट और अन्य मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की है। समाचार रिपोर्ट में जिसमें बताया गया था कि भीषण गर्मी में पूरा बिलासपुर जिला जल संकट से गुजर रहा है और पीएचई विभाग के पास जल संकट वाले गांवों की सूची नहीं है इन सब मामले को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश अमितेंद्र प्रसाद की बेंच में सुनवाई हुई। इन मामलों के मद्देनजर आयुक्त, नगर निगम, बिलासपुर को अगली तिथि से पूर्व इन दोनों विषयों पर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं मामले को आगे की निगरानी और अनुपालन के लिए 22 मई 2025 को सूचीबद्ध किया गया है।

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