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केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता कही बड़ी बात, बताया नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़े ऑपरेशन में सच,

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर के कर्रेगट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबल, नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे ऑपरेशन चला रही हैं जिसका नाम है ऑपरेशन कगार… इसे लेकर ये कहा जा रहा है कि ये नक्सलियों के खिलाफ आखिरी लड़ाई है.. क्योंकि इसमें करोड़ो के इनामी नक्सली लीडर हिड़मा और देवा सहित कई बड़े नक्सली शामिल है.. वहीं नक्सली लगातार इस ऑपरेशन को रोकने की मांग कर रहे हैं..

वहीं एक बार फिर नक्सलियों ने एक पत्र जारी किया है.. जिसमें उन्होने बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार होने की बात कही है.. इसके अलावा काफी सारे आरोप भी लगाए हैं.. उन्होने कहा कि जनवरी 2024 से केंद्र और राज्य के पुलिस, अर्धसैनिक, कमांडो बलों ने ऑपरेशन कगार के नाम से सैकड़ों माओवादियों और निर्दोष आदिवासियों की हत्याएं की है.. जो अब भी जारी है,.. इसकी उन्होने निंदा करते हुए कहा कि देश-दुनिया में कई जनवादी, क्रांतिकारी जन संगठनों, पार्टियों, सामाजिक संस्थाओं एवं कार्यकर्ताओं, प्रगतिशील, जनवादी और क्रांतिकारी बुद्धिजीवी, सैकड़ों की तादाद में आंदोलनरत हैं.. और उनकी मांग है कि ऑपरेशन कगार पर फौरन रोक लगाया जाए.. और युद्ध विराम की घोषणा की जाए.. साथ ही कहा गया कि सरकार और माओवादी मिलकर इस वार्ता के जरिए समस्या का हल निकाला जाए..

वहीं उन्होने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हमारे कामरेड्स की हत्या को अंजाम दें रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि, बाकी माओवादी आत्मसमर्पण करें, नहीं तो उनका भी हश्र यही होगा.. भारत देश के संविधान में लोगों को जीने का अधिकार जो दिया गया है उसे कुचला जा रहा है…संवैधानिक तरीके से चुनी गयी सरकारें ही.. उसी संविधान का नजरअंदाज कर रही है वे खुलेआम कहती है कि बंदूक का समाधान बंदूक से ही होगा छत्तीसगढ़ व तेलगाना की सीमा इलाके में करेंगुट्टा इलाके का नाकेबंदी कर तेलंगाना छत्तीगढ़ व महाराष्ट्र से 10 हजार पुलिस, अर्धसैनिक व कमाठो बलों की तैनाती कर 3 दिनों से एक बड़े ऑपरेशन चलाते हुए न सिर्फ हमारे 3 कामरेडों की हत्या की गई है.. बल्कि पार्टी के नेतृत्व की भी हत्या करने की कोशिश कर रही हैं.. ’

वहीं उन्होने शांति वार्ता को लेकर कहा कि मैंने केंद्रीय कमेटी के ओर से 28 मार्च को एक बयान जारी किया था.. जिसमें मैंने कहा था कि, सरकार के साथ शांति वार्ता करने के लिए हम तैयार है..  शांति वार्ता के लिए अभी तक मेरे तरफ से जारी की गए  पत्र और उत्तर-पश्चिम सबजोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश द्वारा जारी किए पत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन पत्रो को मिलाकर, हमने कुल तीन पत्र जारी किए गए हैं,..‘एक तरफ बिना शर्त वार्ता करने की कोशिशें की जा रही हैं… और दुसरी तरफ  इस तरह के क्रांतिकारियों और आदिवासियों की हत्या.. ऐसे में शांति वार्ता के लिए की जा रही यह प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं होगा..

हमारी पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने केंद्र व राज्य सरकारों से फिर एक बार अपील करती है कि शांति वार्ता के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए इन हत्याकांडों पर रोक लगाया जाए और देश के छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश राज्यों में एक समयसीमा के साथ युद्ध विराम की घोषना की जाए…  देश के तमाम कमेटियों की अपील है कि शांति वार्ता के लिए और समस्या का हल के लिए हमारी इस जायज मांग का समर्थन करें और शाति वार्ता के लिए केंद्र व राज्य सरकारे सहमत होने का प्रयास करें।’

 

बता दें कि हाल ही नक्सल संगठन के उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश ने एक लैटर जारी किया था.. जिसमें उसने तुरंत इस ऑपरेशन को रोकने की मांग करते हुए कहा था कि बस्तर में बंदूक के दम पर शांति नहीं लाई जा सकती.. उन्होंने पहले ही शांति वार्ता के लिए माहौल बनाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की…इसके साथ ही उसने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा था कि एक ओर बातचीत की बात होती है, तो दूसरी ओर जंगलों में फोर्स भेज दी जाती है… वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और ही दिख रही है…

वहीं बीते दिन ही तेलंगाना के पूर्व सीएम KCR ने भी इसे लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा था कि छत्तीसगढ़ में केंद्र और राज्य सरकार की ऑपरेशन कगार से निर्दोष आदिवासियों की मौत हो रही है… मैं केंद्र सरकार से ऑपरेशन कगार को बंद करने की अपील करता हूँ।  वहीं उन्होने कहा कि नक्सली शांति वार्ता का प्रस्ताव सरकार को भेज रहे हैं… सरकार की ओर से कोई पहल नहीं किया जा रहा है… इसलिए मैं केंद्र सरकार को ऑपरेशन रोकने के लिए पत्र लिखूंगा.. ऑपरेशन कागरी को रोका जाना चाहिए… केंद्र और राज्य सरकारें नक्सलियों पर क्रूरतापूर्वक अत्याचार कर रही हैं और उनकी हत्या कर रही हैं…

 

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