सजा मां बम्लेश्वरी का दरबार, डोंगरगढ़ में आज से श्रद्धालुओं का तांता

डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ के पहाड़ की चोटी पर विराजित मां बम्लेश्वरी के मंदिर में आज से शारदीय नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत हो गई है। मंदिर का आंगन और मार्ग फूलों, रंगोली और दीपों से सज गया है। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और मां बम्लेश्वरी के जयकारों की गूंज पूरे डोंगरगढ़ में सुनाई दे रही है। देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भक्त नवरात्र के नौ दिनों तक यहां पहुंचेंगे ताकि मां के दर्शन के साथ अपनी मनोकामना पूरी कर सकें।
मंदिर प्रबंधन ने नौ दिनों तक चलने वाली आराधना की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। रेलवे और जिला प्रशासन ने यात्रा सुगमता, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात किए गए हैं ताकि भक्त सुरक्षित रूप से दर्शन कर सकें।
इस साल नवरात्र 22 सितंबर से 1 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा, जबकि 2 अक्टूबर को विजयदशमी होगी। घटस्थापना एकम को, हवन अष्टमी को और विसर्जन नवमी को होगा। नवरात्र के दौरान माता के दरबार में चौबीस घंटे श्रद्धालुओं का तांता रहेगा।
बम्लेश्वरी मंदिर लगभग 1,600 फीट ऊँचाई पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए लगभग 1,000 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। रोपवे भी श्रद्धालुओं को चोटी तक पहुंचाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह स्थल प्राचीन काल से आस्था का केंद्र रहा है और इसकी उत्पत्ति लगभग 2,200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मंदिर से जुड़ी कथाओं में राजा वीरसेन, विक्रमादित्य और पांडवों का उल्लेख मिलता है।
नवरात्र का आध्यात्मिक आयाम भीड़-रौनक से अलग है। यह पर्व मां के नौ रूपों की आराधना, आत्मिक अनुशासन और अज्ञान पर ज्ञान, अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। भक्त उपवास, कीर्तन और रात्रि पूजा में शरीक होकर आशीर्वाद की कामना करते हैं। यह मेला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक जीवन का उत्सव भी बनकर उभरता है।





