रेलवे स्कूल में ‘आदित्यान्वेषण’ समर कैंप का सफल आयोजन, बच्चों ने दिखाई अपनी प्रतिभा

रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल द्वारा 26 मई से 6 जून 2025 तक मिश्रित हायर सेकेंडरी स्कूल बीएमवाई में ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक प्रशिक्षण शिविर ‘आदित्यान्वेषण’ का आयोजन किया गया। इसका समापन समारोह 14 जून को बीएमवाई रेलवे स्कूल के मुक्ताकाशी मंच में हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी श्री आदित्य कुमार शामिल हुए।
प्रतिभाओं को तराशने का मंच बना शिविर
वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी राहुल गर्ग ने शिविर की शुरुआत में बताया कि ‘आदित्यान्वेषण’ का मतलब है – उगते हुए सूर्य की खोज। शिविर का उद्देश्य भी बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें निखारना था। उन्होंने कहा कि मोबाइल की आदत से दूर कर बच्चों को कला की ओर ले जाना आज की ज़रूरत है।
कला-संस्कृति की नई शुरुआत
इस 12 दिवसीय शिविर में चरोदा, कुम्हारी, भिलाई-3 और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के 90 बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों को नाटक, नृत्य, संगीत, चित्रकला आदि विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के अंत में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
लगभग 50 प्रशिक्षुओं ने कला साहित्य अकादमी के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में खुद ही नाटक लिखे, निर्देशन किया और मंच पर प्रदर्शन भी किया। ‘बूढ़ी काकी’, ‘सरपंच कप क्रिकेट लीग’ और ‘पालन-पोषण’ जैसे नाटकों ने सामाजिक संदेश भी दिए।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन बना सीखने का जरिया
इस शिविर को सफल बनाने में कला साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षक – मणिमय मुखर्जी, पी.पी. विश्वास (बबलू), बरुण चक्रवर्ती, पार्थो चक्रवर्ती, गौतमी चक्रवर्ती, साई चक्रवर्ती और अन्य कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों को प्रस्तुति, कोरियोग्राफी, गायन और मंच संचालन जैसे विषयों की बारीकियाँ सिखाईं।
समापन समारोह में हुआ सम्मान
समारोह के दौरान सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र और प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राहुल गर्ग की पत्नी अनुप्रिया गर्ग, डी. विजय कुमार, डी. लक्ष्मी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन फरीदी निसार अहमद और नेमानी हेमा ने किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में रेलवे के अधिकारियों, शिक्षकों और समर्पित टीम के सदस्यों- बी.डी. प्रसाद, बलवंत शर्मा, राबर्ट जोसेफ, केसरी बाग, और अन्य सहयोगियों ने अहम भूमिका निभाई।
यह शिविर न सिर्फ बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि चरोदा क्षेत्र में एक नई सांस्कृतिक चेतना की शुरुआत भी बन गया।





