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बॉलीवुड में बनी कुछ ऐसी फिल्में, जिसे देखकर शातिरों ने किया क्राइम?

मुंबई। बॉलीवुड में कई ऐसे फ़िल्में बनी हैं, जिन्हें देखकर लोगों को कुछ कर गुजरने की प्रेरणाएं मिली, तो कुछ ऐसी भी फ़िल्में आई जिन्हें देखकर लोगों ने क्राइम करना शुरू किया। साथ ही फिल्मों में जिस तरह से क्राइम के सबूत मिटाए गए ठीक बिल्कुल उसी तरह अपराधियों ने भी सबूत मिटाने के प्रयास किए, लेकिन अपनी इस प्रयास में वे सभी असफल रहे। पकड़े जाने के बाद अपराधियों ने फिल्मों को देखकर क्राइम करने की बात भी कबूल की। जी हां आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे ही फिल्मों की, जिनसे आइडिया लेकर लोगों ने अपराध किया और पकडे गए। तो चलिए जानते है कि आखिर वो कौन-कौन सी फ़िल्में हैं, जिसका आइडिया कॉफी कर लोगों ने क्राइम जैसे खुनी खेल को अंजाम दिया?

शुरुआत करते हैं सनी देओल और शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म “डर” से, जिसमें शाहरुख़ खान एक सनकी प्रेमी राहुल मेहरा की भूमिका में नजर आए थे, जो अपने एकतरफा प्यार को पाने के लिए किरण यानी की जूही चावला का पीछा करता है। साथ ही अपहरण करने की कोशिश करता है और हिंसा और धमियों का सहारा लेता है। इस किरदार की सनक ने दिल्ली के एक युवक को इतना प्रभावित किया कि उसने वास्तविक जीवन कारनामा कर दिया। उसने स्नैपडील में काम करने वाली एक लड़की का एक साल तक पीछा किया। सनकी युवक उसकी हर मूवमेंट पर नजर रखता था, आखिरकार उसने लड़की का अपहरण करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे समय रहते गिरफ्तार कर लिया।

 

इरफान खान की फिल्म हिंदी मीडियम में एक परिवार अपने बच्चे को अच्छे स्कुल में दाखिला दिलाने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति को झूठा साबित करता है। साल 2013 में एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां एक परिवार ने फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाया। उन्होंने दिखाया कि वे झुग्गी में रहते हैं और उनकी सालाना आय 67 हजार रुपये है, जबकि हकीकत में वे करोड़पति थे। इस परिवार ने फिल्म हिंदी मीडियम को देखने के बाद ऐसा कारनाम किया था।

 

अब हम बात करते हैं फिल्म बंटी और बबली की, जिसमें अभिषेख बच्चन और रानी मुखर्जी ने ठगों की भूमिका निभाई है, जो अपनी चालाकी से लोगों को लूटकर ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं। इस फिल्म से प्रेरित होकर दिल्ली के एक जोड़े ने साल 2013 में ठगी का धंधा शुरू किया। वे लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसे लूटते और फरार हो जाते। पुलिस ने उन्हें पकड़ा, तो उन्होंने बंटी और बबली फिल्म से प्रेरणा लेने की बात कबूल की।

 

अजय देवगन की फिल्म दृश्यम एक ऐसी थ्रिलर कहानी पर आधारित है, जहां एक आम आदमी अपनी बेटी और पत्नी द्वारा की गई हत्या को चतुराई से छिपाता है। उसकी योजना इतनी सटीक होती है कि पुलिस को भनक तक नहीं लगती। इंदौर में एक राजनेता ने इस फिल्म की नक़ल करने की कोशिश की। उसने एक लड़की की हत्या की और पुलिस को चकमा देने के लिए अपने घर के पीछे एक कुत्ते के बच्चे को मारकर सबूत छिपाने की कोशिश की, लेकिन उसका अपराध जांच में सामने आ गया। इस अपराध को बखूबी फिल्म दृश्यम की कहानी के तहत अंजाम दिया गया था।

 

धूम फिल्म के बारे में भला कौन नहीं जानता। इसी एक्शन फिल्म ने सुपरबाइक्स को भारत में लोकप्रिय बनाया, हालांकि फिल्म में जॉन इब्राहम और उनके गिरोह द्वारा कसीनों की दीवार तोड़कर लूट का दृश्य कई अपराधियों को भा गया। केरल में एक गिरोह ने शोरूम की दीवार तोड़कर 8 करोड़ रुपये की चोरी की, जो धूम फिल्म की कहानी से काफी मिलती-जुलती थी। फिलहाल इस फिल्म के बाद से सुपरबाइक्स का इस्तेमाल कर आरोपियों ने कई वारदात को अंजाम दिया है।

 

अक्षय कुमार की फिल्म स्पेशल 26 सन 1987 की एक सच्ची घटना पर आधारित है। जिसमें नकली सीबीआई अधिकारी बनकर एक व्यापारी से 35 लाख रुपये लुटे गए थे। फिल्म रिलीज के बाद मुंबई में साल 2013 में एक मामला सामने आया, जिसमें कुछ लोग नकली अधिकारी बनकर कारोबारियों पर छापे मारकर 21 लाख रुपये लूटकर फरार हो गए। ऐसा ही एक किस्सा रायपुर में भी हुआ था। इस फिल्म के रिलीज होने के बाद देश के कई राज्यों में नकली अधिकारी बनकर लूट करने की घटना सामने आई थी।

 

एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर धोखे से एक बड़ी कंपनी में नौकरी पाने में कामयाब हो गया। वर्चुअल इंटरव्यू में किसी और को अपनी जगह बैठाकर उसने नौकरी तो पा ली, लेकिन कुछ समय बाद ही उसका भांडा फुट गया। यह कहानी फिल्म ड्रैगन जैसी लगती है, लेकिन असल जीवन में ऐसी घटना हो चुकी हैं। तेलंगाना के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर रापा सांई प्रशांत को इस फिल्म ने इतना प्रभावित किया कि उसने वास्तविक जीवन में ऐसा ही करने की ठान ली। हालांकि उसका यह कारनामा 15 दिनों में कंपनी के सामने आ गया। दरअसल कंपनी में काम शुरू करने के बाद सहकर्मियों को शक हुआ, क्योंकि प्रशांत की आवाज इंटरव्यू में वह जबरदस्त अंग्रेजी बोल रहा था, लेकिन ऑफिस में उसे बेसिक बातचीत में भी दिक्कतें आ रही थी।

 

ऐसे में और भी कई फ़िल्में हैं, जिन्हे देखने के बाद लोगों के जहन क्राइम सीन ने जन्म लिया। और देशभर में फ़िल्मी अंदाज में क्राइम हुए। लेकिन फिल्मे आखिर फ़िल्में ही होती है, ये शायद इन आरोपियों को नहीं पता था और यही कारण है कि इन सभी के अपराध पकडे गए और सभी को जेल काटना पड़ा। वही इस मामले के कई आरोपी अभी भी जेल में सजा काट रहे हैं।

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