सक्ति में माइक्रोफाइनेंस संस्था पर गंभीर आरोप, FIR न होने से पीड़ित पूर्व कर्मचारी परेशान

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक माइक्रोफाइनेंस और कोऑपरेटिव संस्था पर नियमों के उल्लंघन, आर्थिक गड़बड़ी, कूट रचना और कर्मचारियों को झूठे मामलों में फंसाने के आरोप लगे हैं। संस्था के पूर्व कर्मचारी उपेंद्र नाथ चंद्रा ने बिलासपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया के सामने अपनी बात रखी।

उपेंद्र नाथ चंद्रा का कहना है कि जिस संस्था में वे काम कर रहे थे, उसका पंजीकरण एक नाम से है, लेकिन संचालन किसी दूसरे नाम से किया जा रहा है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर लोन बांटे गए, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जांच एजेंसियों व न्यायालय को गुमराह किया गया।

उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा 150 से अधिक कर्मचारियों को अलग-अलग तरीकों से फंसाया गया। कई कर्मचारियों से कथित तौर पर लाखों रुपये वसूले गए और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने सिमगा, गुंडरदेही, बलौदाबाजार, बालोद और सक्ती जिलों में पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन संज्ञेय अपराध होने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उपेंद्र का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी अनदेखी है।

उपेंद्र नाथ चंद्रा ने यह भी बताया कि हाल ही में जमीन विवाद के दौरान उनके और उनके पिता के साथ मारपीट हुई, जिसमें उन्हें निजी खर्च पर इलाज कराना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों के बावजूद पुलिस और संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़ित ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, संबंधित संस्था को बंद करने और न्याय दिलाने की मांग की है।

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