29 मार्च को शनि अमावस्या, जानें किस राशि पर कितना पड़ेगा प्रभाव?

नई दिल्ली। शनिचरी अमावस्या पर 29 मार्च को शनि देव राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। शनि देव गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेंगे, जिसका प्रभाव कुछ राशियों पर सकारात्मक रूप में पड़ेगा, तो वहीं कुछ राशियों कुछ राशियों को इसके नकारात्मक परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं। हालांकि इस दिन पर शनिश्चरी अमावस्या और सूर्य ग्रहण का संयोग भी रहने वाला है, लेकिन सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई नहीं पड़ने के कारण इसका कोई प्रभाव नहीं होगा।
शनि देव के मीन राशि में प्रवेश करने से मकर राशि पर साढ़े साती समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही मीन राशि पर साढ़े साती का प्रभाव और कुम्भ राशि पर साढ़े साती का प्रभाव शुरू होगा। धनु राशि वाले जातकों पर शनि की ढैय्या शुरू होगी, ज्योतिषचार्यों के अनुसार शनि के राशि परिवर्तन के दौरान व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ फलों की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषियों के मुताबिक 29 मार्च को शनि के मीन राशि में प्रवेश करने से मकर राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती समाप्त होगी। वहीं इस गोचर से कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर से ढैय्या का प्रभाव खत्म होगा। ज्योतिष गणना के अनुसार न्याय के देवता शनि के मीन राशि में प्रवेश करने से कुंभ राशि, मीन राशि और मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। मीन राशि के लोगों पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण, जबकि कुंभ राशि वालों पर अंतिम चरण होगा।
वहीं मेष राशि के लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण शुरू होगा। इसी के साथ सिंह और धनु राशि वालों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव शुरू होगा। शनि की ढैय्या के प्रभाव से धन हानि, कार्यों में बाधाओं व मानसिक तनाव झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वही 29 मार्च शनि देव की कृपा प्राप्त करने और शनि दोष मुक्ति के लिए एक बेहतर दिन साबित हो सकता है। इस दिन शनि देव को खुश करने से इंसान ना ही केवल दोषों से मुक्त हो जाता है, बल्कि शनिदेव अपनी कृपा भी भक्तों पर बरसाते हैं।
इस दिन शनि देव के समक्ष सरसों तेल का दीपक जलाएं, जिसमे काले उड़द की साबुत दाल, काले तिल और 1 लोहे की कील डालें। ऐसा करने से शनि देव खुश होते हैं। काले तिल, काला कंबल, उड़द की दाल और काले वस्त्र गरीबों एवं जरूरतमंदों को दान करें, इससे शनि दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। वही पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें और उसके समक्ष दीपक जलाएं। यह शनि दोष से मुक्ति में लाभकारी माना जाता है।
इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करने से भी शनि दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। शनि अमावस्या पर गंगा स्नान करने से भी पापों से मुक्ति मिलती है और शनि दोष के प्रभाव कम होते हैं। इसके अलावा इस दिन हनुमान जी को सिंदूर और घी का चोला चढ़ाकर गुड़ और चने का भोग लगाएं। इससे बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।
ज्योतिषचार्यों की माने तो जन्म कुंडली में शनि दोष के निवारण के लिए इस दिन नीलम रत्न धारण करने से शनि का अशुभ प्रभाव कम होता है। साथ ही शनि देव के मंत्रों के जाप से भी शनि दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। वही घर में शनि यंत्र की स्थापना कर उसकी पूजा करने से भी शनि देव की कृपा बरसाती है। 29 मार्च को शनिचरी अमावस्या के दिन आप इनमें से कोई भी उपाय कर सकते हैं, जिससे शनि देव को प्रसन्न किया जा सकता है और शनि दोष के प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है।




