ग्रामीण सेवा से पीछे हटे 43 डॉक्टरों पर सख्ती: स्वास्थ्य विभाग वसूलेगा 17 करोड़ से ज्यादा की पेनल्टी

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में नियुक्ति के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले 43 डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 15 एमबीबीएस और 28 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। विभाग इन डॉक्टरों से कुल 17 करोड़ 75 लाख रुपए की पेनल्टी वसूलने की तैयारी में है। बताया गया है कि डॉक्टरों ने न केवल ग्रामीण सेवा ज्वाइन नहीं की, बल्कि नोटिस का संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया।
ग्रामीण सेवा के लिए भरवाया जाता है बांड
राज्य में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों के लिए दो साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा का नियम लागू है। इसके तहत एमबीबीएस डॉक्टरों से 25 लाख और पीजी डॉक्टरों से 50 लाख रुपए का बांड भरवाया जाता है। बांड में स्पष्ट उल्लेख रहता है कि ग्रामीण सेवा नहीं देने पर निर्धारित राशि वसूली जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2025 में 655 चिकित्सा अधिकारियों और 155 विशेषज्ञ डॉक्टरों की संविदा नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इनकी पोस्टिंग ग्रामीण अस्पतालों में की गई थी, लेकिन कई डॉक्टरों ने नियुक्ति स्थल पर ज्वाइन नहीं किया।
नोटिस के बाद 54 डॉक्टरों ने किया ज्वाइन
स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर 2025 से गैरहाजिर डॉक्टरों को नोटिस भेजना शुरू किया था। इसके बाद 54 डॉक्टरों ने मेडिकल प्रमाणपत्र और ज्वाइनिंग लेटर जमा कर सेवा ज्वाइन कर ली। इनमें 37 एमबीबीएस और 17 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल थे।
हालांकि, 43 डॉक्टर ऐसे रहे जिन्होंने नोटिस का जवाब तो दिया, लेकिन नियुक्ति स्थल पर नहीं पहुंचे। कुछ डॉक्टरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी, बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने जैसे कारण बताए।
जिलों के कलेक्टरों को भेजी गई कार्रवाई की सूचना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों को बांड भरते समय ही ग्रामीण सेवा की शर्तों की जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद सेवा से पीछे हटना नियमों का उल्लंघन माना गया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर अब संबंधित जिलों के कलेक्टरों को कार्रवाई के लिए सूचना भेजी गई है। विभाग का कहना है कि जल्द ही पेनल्टी वसूली की प्रक्रिया तेज की जाएगी।





