छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार निरंजन दास कथित सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे और आबकारी नीति से जुड़े कई फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने निरंजन दास को भी शर्तों के साथ राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे और केवल जांच या कोर्ट पेशी के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।
30 करोड़ से ज्यादा कमीशन लेने का आरोप
EOW की जांच के मुताबिक निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने आबकारी विभाग में पदस्थापना, शराब ब्रांड की सप्लाई और जिलों में वितरण व्यवस्था तय करने में अहम भूमिका निभाई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे सिस्टम को उन्होंने आईटीएस अधिकारी एपी त्रिपाठी के साथ मिलकर संचालित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित घोटाले के जरिए उन्हें 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला। आरोप है कि शराब नीति तैयार करने और उससे कुछ कारोबारियों को फायदा पहुंचाने में उनकी भूमिका थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर सितंबर 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
घोटाले में कई बड़े आरोपी पहले से जमानत पर
इस मामले में पहले ही कई बड़े आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों से जमानत मिल चुकी है। इनमें रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, निलंबित IAS रानू साहू, समीर विश्नोई, राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई नाम शामिल हैं।
सभी आरोपियों को राज्य से बाहर रहने और जांच को प्रभावित नहीं करने जैसी शर्तों पर राहत दी गई है। अधिकांश मामलों में ट्रायल अभी जारी है।
3200 करोड़ रुपए के घोटाले का दावा
प्रवर्तन निदेशालय और EOW के अनुसार छत्तीसगढ़ में करीब 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि सिंडिकेट ने डिस्टलरी संचालकों से कमीशन लिया, नकली होलोग्राम वाली शराब सरकारी दुकानों में बिकवाई और सप्लाई जोन तय कर अवैध वसूली की।
जांच में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के कई जिलों में नकली होलोग्राम और अवैध सप्लाई के जरिए शराब बेची गई। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में ट्रायल चल रहा है।





