कांकेर में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, 10 लाख के तालाब गहरीकरण में अनियमितता के आरोप

कांकेर जिले के चारामा विकासखंड में मनरेगा के तहत स्वीकृत एक तालाब गहरीकरण कार्य में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने शिकायत करते हुए दावा किया है कि मजदूरों से कराए जाने वाले कार्य में मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि मजदूरों के नाम पर मस्टररोल भरकर भुगतान निकाला गया। मामले को लेकर जिला प्रशासन से जांच की मांग की गई है।
मजदूरों की जगह मशीनों के इस्तेमाल का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम गोटीटोला के आश्रित ग्राम चंदेली में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से तालाब गहरीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि इस कार्य में जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई लोगों के नाम पर मजदूरी भुगतान दर्शाया गया, जबकि उन्होंने कार्यस्थल पर कोई काम नहीं किया। ग्रामीणों ने इस मामले को योजना के नियमों के विपरीत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बिना काम किए भुगतान मिलने का दावा
कुछ पंचों ने आरोप लगाया है कि उनके खातों में 12-12 हजार रुपये की राशि जमा हुई, जबकि उन्होंने एक दिन भी काम नहीं किया। उनका कहना है कि उनके जॉब कार्ड में भी किसी प्रकार की मजदूरी दर्ज नहीं है।
ग्रामीणों ने लिखित शिकायत में कहा है कि यदि बिना कार्य किए भुगतान किया गया है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जांच टीम गठित, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
मामले पर ग्राम सरपंच ने कहा कि उन्हें कथित भुगतान की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और राशि की वसूली भी की जानी चाहिए।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। ऐसे में यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह योजना के मूल उद्देश्य के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।





