दौरे के बाद हेलीपैड निर्माण का टेंडर, प्रक्रिया पर उठे सवाल

उपराष्ट्रपति के दौरे के लिए बनाए गए हेलीपैड के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार पहले हेलीपैड का निर्माण किया गया और उसके बाद उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इस पूरी प्रक्रिया ने निर्माण और भुगतान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दौरे के बाद पूरी हुई कागजी प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक उपराष्ट्रपति के दौरे के लिए तीन हेलीपैड बनाए गए थे, लेकिन टेंडर, स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाएं दौरे के बाद पूरी की गईं। दौरे के 12 दिन बाद वर्क ऑर्डर जारी हुआ, इसके बाद माप, अनुशंसा और तकनीकी स्वीकृति दी गई। यहां तक कि निर्माण का सत्यापन भी काफी देर बाद किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह पैदा हो गया है।
तकनीकी मानकों में भी गड़बड़ी
हेलीपैड निर्माण में तकनीकी नियमों के उल्लंघन की बात भी सामने आई है। निर्माण कार्य के लिए अलग मानकों का उपयोग किया गया, जबकि स्वीकृति दूसरे मानकों से दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार हेलीपैड जैसे निर्माण के लिए सख्त तकनीकी मानकों का पालन जरूरी होता है, ताकि सुरक्षा में कोई जोखिम न हो।
भुगतान में अनियमितता की शिकायत
मामले में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप भी लगे हैं। शिकायत के अनुसार कम लागत वाले काम के लिए अधिक भुगतान किया गया है। साथ ही कुछ कटौतियां भी नियमों के विपरीत बताई गई हैं। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित जिम्मेदारों से जवाब मांगा गया है।





